केजरीवाल का जादू लोगों पर सर चढ़कर बोला

दिल्ली, अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) एक ऐसा नाम है जो अन्ना आंदोलन से निकला हुआ चेहरा है। जो एक आप पार्टी का गठन करके दिल्ली विधानसभा चुनाव 2013 लड़ने की घोषणा करते है। उस समय तक न तो बीजेपी और न ही दिल्ली की सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी को उम्मीद रही होगी कि एक दिन यह केजरीवाल नामक व्यक्ति राजनीति में ऐसा छाप छोड़ेगा कि कई दिग्गजों का होश उड़ा देगा।

खैर, फिर 5 साल बाद अरविंद केजरीवाल का जादू लोगों के सर चढ़कर बोल रहा है। तो उसमें कई वजहें है- जैसे एक जमाने में रोटी,कपड़ा,मकान का लोगों के जीवन में प्रधानता रहा, तो आज उसकी जगह बिजली, पानी और परिवहन व्यवस्था ने ले ली है तो कहना गलत नहीं होगा। कारण आज तेजी से बढ़ रहे मध्यमवर्गीय के पास रोटी,कपड़ा तथा मकान की वैसी समस्या नहीं रही जो 30 साल पहले तक रही। अब इसी मध्यमवर्गीय लोगों के पास बिजली महंगी होने, पानी की समस्या, और परिवहन व्यवस्था एक चुनौती बनती गई है। इसी पर अरविंद केजरीवाल ने सधी चाल चली तो विपक्षी पार्टियों के पास विरोध करने के लिये मुद्दे का लगातार अभाव होता गया। जिसका सीधा-सीधा फायदा उठाने में केजरीवाल 20 साबित हुए है। 
अब जबकि अरविंद केजरीवाल दुबारा सत्ता में आ ही गए है तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी, यह बहुत महत्वपूर्ण है। हालांकि अरविंद केजरीवाल को जिस तरह से दिल्ली वालों ने अपना बेटा मानते हुए सत्ता की चाबी थमाई है उससे उनसे अपेक्षाएं भी बढ़ गई है। अरविंद केजरीवाल को फिर से जनता की वहीं अपेक्षा बिजली,पानी और परिवहन व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करना होगा। उन्हें अपने उस वायदे को पूरे करने होंगे कि बिजली-पानी और महिलाओं के मुफ्त बस यात्रा को अगले 5 साल तक जारी रखना होगा। जैसा कि बीजेपी ने जनता को यह समझाने की नाकाम कोशिश की यह जितनी भी योजनाएं है उसे अरविंद केजरीवाल अगले मार्च तक ही लागू करेगी।

दूसरा केजरीवाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती रहेगी कि दिल्ली के बिगड़ते माहौल को सोहार्दपूर्ण वातावरण में तब्दील करना। खासकरके शाहीन बाग जैसे प्रदर्शन अब खत्म होगें या नहीं, यह बहुत बड़ा सवाल होगा। अब दिल्ली वालों के जेहन में यह भी सवाल रहेगा कि केजरीवाल बुजूर्गों और युवाओं के लिये रियायत की कब घोषणा करते है। साथ ही प्रदूषण- दिल्ली की बहुत बड़ी समस्या है जिसको हल करना केजरीवाल की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होगी। इसके अलावा यमुना सफाई की उनकी महात्वाकांक्षी योजना पर वे कैसे आगे बढ़ेंगे यह देखना दिलचस्प होगा।

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