टिकट कटते ही इमोशनल हुए पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय

पटना.  बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ( को विधानसभा चुनाव में जेडीयू (JDU) का टिकट नहीं मिल सका है. बिहार की बक्सर (Buxar) सीट से टिकट के प्रबल दावेदार गुप्तेश्वर पांडेय के चुनाव लड़ने की संभावनाएं उस वक्त खत्म हो गई जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बक्सर सीट से अपने उम्मीदवार के तौर पर परशुराम चतुर्वेदी के नाम की घोषणा कर दी इसके बाद तो मानो बिहार की सियासत में एक बार फिर से सरगर्मी बढ़ गई. दरअसल कुछ दिन पहले बिहार के पूर्व पुलिस अधिकारी ने नौकरी से एच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर जदयू का दामन थामा था.

इसके साथ यह कयास लगाए जा रहे थे कि वह बिहार के बक्सर सीट जो कि उनका पैतृक जिला भी है से विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे लेकिन चुकी ये सीट बीजेपी के खाते में थी ऐसे में गुप्तेश्वर पांडेय की मुश्किलें लगातार बढ़ रही थीं और नामांकन के अंतिम दिन तिथि कुछ घंटे पहले ही बक्सर सीट से बीजेपी के खाते में परशुराम चतुर्वेदी के नाम का ऐलान कर दिया गया. पांडेय को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि उनको जेडीयू वाल्मीकि नगर लोकसभा क्षेत्र से उपचुनाव लड़ाएगी लेकिन वहां से भी गुप्तेश्वर पांडे को पार्टी ने टिकट नहीं दिया है. इसको लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें चल रही है. सोशल मीडिया में जबरदस्त फैन फॉलोइंग रखने वाले गुप्तेश्वर पांडेय ने इस घटना के बाद एक पोस्ट लिखा है और अपने शुभचिंतकों से धैर्य धारण करने की अपील की है.

अपने अनेक शुभचिंतकों के फ़ोन से परेशान हूँ। मैं उनकी चिंता और परेशानी भी समझता हूँ। मेरे सेवामुक्त होने के बाद सबको उम्मीद थी कि मैं चुनाव लड़ूँगा लेकिन मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहा। हताश निराश होने की कोई बात नहीं है। धीरज रखें। मेरा जीवन संघर्ष में ही बीता है। मैं जीवन भर जनता की सेवा में रहूँगा। कृपया धीरज रखें और मुझे फ़ोन नहीं करे। बिहार की जनता को मेरा जीवन समर्पित है। अपनी जन्मभूमि बक्सर की धरती और वहाँ के सभी जाति मज़हब के सभी बड़े-छोटे भाई-बहनों माताओं और नौजवानों को मेरा पैर छू कर प्रणाम! अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें !

मालूम हो कि 1987 बैच के आईपीएस अफसर रहे गुप्तेश्वर पाण्डेय ने बिहार की राजनीति में 11 साल पहले यानी 2009 में पहले भी उतरने की कोशिश की थी. 2009 में आईजी रहते भी उन्होंने वीआरएस लिया था और उस साल के लोकसभा का चुनाव भी वो बक्सर से ही लड़ना चाहते थे लेकिन टिकट कंर्फ्म नहीं हुआ. बाद में उन्होंने वीआरएस वापस ले लिया.

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