नवरात्रि के नौ दिनों में मां को जरूर लगाएं ये नौ भोग, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं

दिल्ली,  इस साल 17 अक्टूबर से नवरात्रि (Navratri 2020) का शुभारंभ होने जा रहा है, जिसमें पूरे देश में धूमधाम से मां की चौकी सजा कर उनकी पूजा-अर्चना की जाएगी। हिंदू त्योहारों में नवरात्रि पूजा बहुत ही महत्व रखता है। नवरात्रि में नौ दिनों तक मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है और मां को प्रसन्न करने के लिए कई अलग प्रकार की पूजा आराधना करते हैं।

मान्यताओं के मुताबिक कोई भी पूजा बिना भोग के अधूरी मानी जाती है, इसलिए किसी भी देवी देवता की पूजा करते समय उनको भोग लगाना जरूरी होता है तभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं।

मां शैलपुत्री कि ऐसे करें पूजा
नवरात्रि में भी 9 दिनों तक मां को उनका प्रिय भोग लगाकर उन को प्रसन्न किया जाता हैं। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री का पूजन किया जाता है, जिसका अर्थ है पर्वत। यह पर्वतराज हिमालय की पुत्री है जिसके कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा है। मां शैलपुत्री प्रकृति की देवी मानी जाती है, ऐसे में इनके पूजन के समय गाय का शुद्ध घी इनको अर्पित करने से मां प्रसन्न होती है और रोगों से मुक्ति देती है।

खीर से करें चंद्रघंटा की पूजा
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का की पूजा की जाती है, इनके एक हाथ में कमल और दूसरे हाथ में जाप की माला है और इनके नाम का अर्थ है तप का आचरण करने वाली। इनके पूजन के समय सक्कर-मिश्री का भोग लगाने का महत्व है। माना जाता है कि इनके पूजा करने से साधक का मन स्थिर होता है और घर के सदस्य की आयु लंबी होती है।

तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां अर्धचंटा धारण करती हैं, इसलिए इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा है। इनके ध्वनि से बुरी शक्तियां दूर रहती है। बता दें कि मां चंद्रघंटा का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है और इनको खीर का भोग लगाना चाहिए इसके साथ ही सेव और लाल रंग के पुष्प इन्हें अर्पित करना शुभ माना जाता है।

मां कुष्मांडा के मंद मुश्कान से हुई थी ब्रह्मांड की रचना
नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना होती है, मां कुष्मांडा के चेहरे पर मंद मुस्कान बहुत ही मनमोहक लगता है, मान्यता है कि जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कुष्मांडा ने मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए इनका नाम कुष्मांडा पड़ा है। मान्यता है कि मां कुष्मांडा को किसी भी सहज भोग लगाने से वह प्रसन्न होती है। मालपुआ से इन्हें भोग लगाना चाहिए। स्कंद माता को केले का भोग प्रिय है।

मां कालरात्रि को लगेगा गुड़ का भोग
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है, इस लोक में रहकर मां कात्यानी ने अलौकिक तेज की प्राप्ति की है इन्हें शहद का भोग लगाना चाहिए जिससे घर में सुख की प्राप्ति होती है।

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है, जिनका स्वरूप देखने में रौद्र है। मां कालरात्रि राक्षस और दुष्टों का संहार करती है इसलिए इनका यह स्वरूप हमेशा शुभ फलदाई है। मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाना चाहिए।

मां सिद्धिदात्री को नारियल और खीर करें अर्पित
नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा का विधान है, जिन्हें अन्नपूर्णा भी कहा जाता है। मान्यता है कि नए गवर्नर की माना जाता है। इसके कारण इन्हें गौरी कहा जाता है, इनकी पूजा में भोग लगाने के लिए नारियल को सबसे उचित भोग ठहराया बताया गया है।

नवरात्रि के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है मान्यता है कि इनकी पूजा से साधक को हर कार्य में सिद्धि प्राप्त होती है, मां सिद्धिदात्री को नारियल और खीर का भोग लगाना चाहिए।

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