जन-धन एकांउट में सहायता धनराशि ट्रांसफर करे BJP सरकार : पूर्व सीएम अखिलेश यादव

कोरोना वायरस के बढ़ते कहर के बीच विपक्ष ने अब सत्ता में बैठी केंद्र और राज्य की सरकारों पर जनता के हित में कदम उठाने के लिए प्रेशर डालना शुरू कर दिया है। राज्य सरकारें जहां केंद्र की मोदी सरकार से सहायता की गुहार लगा रही हैं, वहीं विपक्ष अपने राज्यों में सक्रियता से जनता की परेशानियों को सरकार के समक्ष उठाने में जुटा है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 

सपा अध्यक्ष ने एक ओर जहां जनता पर हो रहे पुलिस अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई है, वहीं कोरोना की वजह से घरों में कैद हुए लोगों की सहायता के लिए सरकार को चेताना शुरू कर दिया है। इसके लिए अखिलेश ने सोशल मीडिया का सहारा लिया है। उन्होंने इसके लिए दो ट्वीट किए हैं। 

इस कठिन समय में सरकार को तत्काल देश के सभी जन-धन खाताधारकों के बैंक एकांउट में सहायता धनराशि ट्रांसफ़र करने का प्रबंध करना चाहिए. साथ ही जो लोग रास्तों पर भटक रहे हैं उनके भोजन-पानी, चिकित्सा और सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए रैन-बसेरों का भी इंतज़ाम करना चाहिए.
अपने पहले ट्वीट में अखिलेश लिखते हैं, ‘इस कठिन समय में सरकार को तत्काल देश के सभी जन-धन खाताधारकों के बैंक एकांउट में सहायता धनराशि ट्रांसफ़र करने का प्रबंध करना चाहिए. साथ ही जो लोग रास्तों पर भटक रहे हैं उनके भोजन-पानी, चिकित्सा और सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए रैन-बसेरों का भी इंतज़ाम करना चाहिए।’ 
बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार ने डिजिटलीकरण के नाम पर 2014 में सत्ता में आने के बाद गरीबों के लिए जन-धन खाताधारकों के बैंक एकांउट  के बैंक एकांउट खुलवाए थे और कहा था कि इसमें ही सभी को सहायता राशि दी जाएगी। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान सरकार ने 15-15 लाख रूपये सभी को देने का जुमाला उछाला था, इसके बाद लोगों को लगा कि सरकार कालाधन लाकर लोगों में वितरित करेगी। इसको देखते हुए लोगों ने जन-धन बैंक एकांउट खुलवाए, लेकिन नोटबंदी के बाद ये खाते खाली हो गए। बैंकों ने खातों में जमा की सीमा निर्धारित कर दी। इसके बाद जो इससे कम राशि के खाते थे, पेनंटी में खाली हो गए। बाद में बंद भी हो गए। 

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