दिहाड़ी मजदूरों ने कहा- Coronavirus से पहले हम लोग भूख से मर जाएंगे

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Covid-19) को लेकर देशभर में हाहाकार मचा हुआ है. लोगों में खौफ इतना है कि लोग आने-जाने का संसाधन नहीं होने के बावजूद पैदल ही घर की तरफ निकल पड़े हैं. पूरे देश दिहाड़ी मजदूरों (Daily Wagers) में इस बात की बेचैनी है कि अगले एक-दो महीने तक उन्हें रोटी का निवाला कैसे मिलेगा. इसलिए औद्योगिक शहरों से उनका गांवों की ओर पलायन हो गया है. आप किसी भी हाइवे पर जाईए अपना सामान सिर और कंधे पर लिए भूखे-प्यासे श्रमिक घरों की ओर जाते मिल जाएंगे. उनका कहना है कि हम कोरोना वायरस के संक्रमण से पहले भूख से मर जाएंगे.

लॉकडाउन (Lockdown)  होने के कारण दिल्ली-एनसीआर की सारी फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं. फैक्ट्रियां में कामकाज बंद होने के कारण इन मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है. ये लोग दिल्ली बॉर्डर पार कर गाजियाबाद के रास्ते यूपी और बिहार के अलग-अलग जगहों पर जा रहे हैं. कुछ लोग दिल्ली आगरा यानी एनएच-2 के रास्ते अपने घर जा रहे हैं. इनमें से ज्यादातर लोग पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ-साथ लखनऊ, बदायूं, बरेली, मुरादाबाद और अलीगढ़ के रहने वाले हैं.

फाइल पास होने का इंतजार 

दिल्ली के श्रम मंत्री गोपाल राय के मीडिया कोर्डिनेटर ने न्यूज 18 हिंदी से कहा, ‘लॉकडाउन के दौरान दिल्ली के दिहाड़ी मजदूरों को सरकार ने 5-5 हजार रुपये देने का ऐलान किया है. दिल्ली सरकार ने यह फाइल एलजी के पास भेजी है. जैसे ही एलजी ऑफिस से फाइल आती है मजदूरों के खातों में 5 हजार रुपये पहुंच जाएंगे. दिल्ली लेबर वेलफेयर बोर्ड के तहत सभी पंजीकृत मजदूरों को यह सहायता राशि मुहैया कराई जाएगी.’

जो मजदूर लेबर वेलफेयर बोर्ड के तहत पंजीकृत नहीं हैं उनके लिए दिल्ली सरकार ने किस तरह का प्लान तैयार किया है. उनके खाने-पीने और रहने के लिए श्रम मंत्रालय क्या कर रहा है? इस पर मीडिया कोर्डिनेटर ने कहा, ‘फिलहाल दिल्ली के सभी जिलों के एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वह खाने का पैकेट बांटे. आज से उन मजदूरों को खाने का पैकेट मिलना शुरू हो जाएगा. जहां तक बात है भूख से पलायन कर रहे मजदूरों और दिहाड़ी मजदूरों को चिन्हित करने का तो उस बारे में काम नहीं शुरू हुआ है. हम लोग जल्द ही इस पर काम शुरू करेंगे. इस बारे में अगर मीडिया को भी कोई जानकारी मिलती है तो वह हमसे साझा कर सकते हैं.’

इन दिहाड़ी मजदूरों का कहना है, ‘हमारे जेब में जो पैसे थे वह अब खत्म हो गए हैं. लॉकडाउन की वजह से कोई गाड़ी भी नहीं चल रही है. कोरोना से पहले हम लोग भूख से मर जाएंगे. चाहे 2 दिन लगे चाहे 2 हफ्ते. रात में कहीं रुक जाएंगे फिर सुबह चल पड़ेंगे. लेकिन, यहां नहीं रह सकते. मालिक फैक्ट्री आता नहीं है तो पैसे किससे मांगें.’

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