आवारा पशु पालकर युवा कमा सकेंगे 5 लाख

मथुरा. केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) ने कहा कि कृषि मंत्रालय उस योजना पर काम कर रहा है जिसके सफल होने पर एक वर्ष में सड़कों पर कोई भी बेसहारा पशु दिखाई नहीं देगा और ऐसे पशुओं को पालकर बेरोजगार युवा (Unemployed Youth) एक साल में तीन से पांच लाख रुपये तक कमा सकेंगे. वह सोमवार को यहां पं. दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान में राष्ट्रीय कृषि योजना (National Agriculture Scheme) के अंतर्गत आयोजित ‘बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से उत्पादकता वृद्धि, संभावनाएं, चुनौतियां एवं रणनीति’ विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन करने पहुंचे थे.

मंत्री ने की योजना की शुरुआत
इस मौके पर उन्होंने पश्चिम बंगाल, अण्डमान एवं निकोबार और उत्तराखण्ड के तीन वैज्ञानिकों को ‘क्रायोप्रिजर्व्ड गोट सीमेन स्ट्रा किटों’ का वितरण कर इस योजना का शुभारम्भ किया तथा विवि द्वारा प्रकाशित इससे संबंधित एक पुस्तक का विमोचन भी किया. मंत्री ने इससे पूर्व विवि के डेयरी फार्म में स्वचालित दुग्ध संयंत्र का शिलान्यास एवं ‘एकीकृत खेती उपकरण व तकनीकी वितरण केंद्र’ का लोकार्पण भी किया. उनके साथ पशुपालन आयुक्त डॉ. प्रवीण मलिक भी थे. कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, ‘‘खेती के पूरे ढांचे को देखते हुए कृषि के मुकाबले पशुपालन में आज भी अपार संभावनाएं हैं. हम यदि ठीक से काम करें तो कोई भी पशुपालक प्रतिवर्ष दूध न देने वाले पशुओं से भी प्रतिवर्ष तीन से पांच लाख रुपये तक कमा सकता है. हम उसी दिशा में काम कर रहे हैं.’’

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