उत्तर प्रदेश में सड़कों पर प्रवासी पैदल चले तो नपेंगे थानेदार

कानपुर. उत्तर प्रदेश में सरकार के निर्देश के बाद अब प्रवासी श्रमिकों (Migrant laborers) के पैदल चलने पर पूरी तरीके से रोक लगा दी गई है. प्रशासनिक अधिकारी इसको लेकर गंभीर होने का दावा कर रहे हैं. क्योंकि जिस प्रकार से बीते मंगलवार की देर रात एक बार फिर से बिल्हौर में प्रवासियों भरे ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें एक दर्जन लोग घायल हुए और एक मासूम की मौत भी हुई है. इस घटना के बाद कानपुर के जिला अधिकारी ब्रह्मदेव राम त्रिपाठी ने इसे गंभीरता से लेते हुए साफ निर्देश दिए हैं कि प्रवासी किसी हाल में पैदल नहीं चलेगा, उसे घर भेजने की व्यवस्था जिला प्रशासन करा रहा है. बता दें कि इससे पहले औरेया व अन्य स्थानों पर भी सड़क हादसों में दर्जनों श्रमिकों की मौत हो गई.

कानपुर (Kanpur) जिला अधिकारी ब्रह्मदेव राम त्रिपाठी ने निर्देश दिया कि यदि कोई प्रवासी सड़क पर पैदल चलता दिखा तो इलाके के थानेदार पर कार्रवाई होगी. जिलाधिकारी त्रिपाठी के निर्देश के बाद हाईवे के किनारे बने थानेदारों में हलचल मच गया है. जिला मजिस्ट्रेट ने क्षेत्राधिकारी और थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण करें और खासकर हाईवे पर सुनिश्चित करें कि कोई प्रवासी श्रमिक सड़क पर पैदल ना चले और पेट्रोलिंग भी की जाए. ताकि यदि कोई पैदल चलता मिले तो उसे आश्रय स्थल तक पहुंचाना थानेदार की जिम्मेदारी है. एडीएम वित्त एवं राजस्व व नगर आयुक्त से समन्वय कर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए हैं.

मालवाहकों में न जाएं मजदूर
कानपुर जिलाधिकारी ब्रह्मदेव राम त्रिपाठी ने सभी थानाध्यक्षों को यह निर्देश दिए हैं कि सुनिश्चित करें कि किसी भी सवारी वाहन के अलावा अन्य वाहन में प्रवासी श्रमिक ना जाएं. यदि मालवाहक वाहनों में श्रमिक जाते हुए मिले तो उन्हें रोककर आश्रय स्थल भेजें. मालवाहक वाहन को तत्काल जप्त करें और मुकदमा दर्ज करें ,किसी भी दशा में प्रवासी पैदल ना चले यदि पैदल चलता प्रवासी जांच के दौरान मिल गया तो संबंधित थाना अध्यक्ष पर कड़ी कार्रवाई होगी. इस आदेश के बाद हाईवे किनारे बने थाना अध्यक्षों और थाना व बीट के सिपाही और उपनिरीक्षक हरकत में आए और सड़कों पर दिखने लगे.

नहीं मानते श्रमिक

कानपुर देहात से कानपुर की सीमा पर लगे सचेंडी थाने की गाड़ी पर मौजूद उपनिरीक्षक ने बताया कि प्रवासी श्रमिक मानते नहीं हैं, अगर सड़क पर रोके तो गांव के रास्ते से किनारे किनारे होते हुए फिर आगे किसी हाईवे पर पहुंच जाते हैं. ऐसे में इन्हें रोकना बड़ा कठिन कार्य है. फिर भी निर्देश का पालन कया जा रहा है.

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