आइए जानें फास्टैग में कैसे बैलेंस पता करते हैं

दिल्ली. रोड ट्रिप्स का अपना मजा और अलग एक्सपीरिएंस है बस अगर टोल्स को छोड़ दें. टोल पर आपको लंबी लाइनों में लगकर इंतजार करना पड़ता है. अब आपको इस मुश्किल से भी छुटकारा मिल सकता है क्योंकि फास्टैग जरूरी हो गया. इसका मतलब यह है कि आप बस FASTag दिखाकर टोल से निकल सकते हैं.नेशनल हाइवेज पर अब टोल पेमेंट के लिए फास्टैग जरूरी हो गया. ये स्टिकर्स होते हैं जिन्हें आप अपनी गाड़ी की विंडशील्ड पर चिपका सकते हैं, ऐसे टोल बूथ से निकलते वक्त इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट हो सकेगा. इसका मकसद 100 फीसदी इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट है.

>> यह एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है जिसे नैशनल हाइवे अथॉरिटी ने चलाया है. इससे आप टोल पेमेंट सीधे लिंक अकाउंट से रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टेक्नॉलजी के जरिए कर सकते हैं.

>> इस वक्त फास्टैग 23 बैंक इशू कर रहे हैं इनमें पेमेंट बैंक, छोटे फाइनैंस बैंक और कोऑपरेटिव बैंक शामिल हैं.

>> बैंकों में मिल रहे ये टैग्स बैंक न्यूट्रल हैं. इसका मतलब है कि आप जिस बैंक से फास्टैग खरीदेंगे उसी से इन्हें रीचार्ज करना पड़ेगा. हालांकि NHAI से मिलने वाले फास्टैग आप किसी भी बैंक अकाउंट से रीचार्ज करवा सकते हैं.

>> अगर आपकी गाड़ी में फास्टैग नहीं और आप फास्टैग लेन में घुस जाते हैं तो आपको दोगुना टोल देना पड़ेगा.आपको इसके लिए 200 रुपये देने होंगे और आपको गाड़ी के हिसाब से एक डिपॉजिट मनी देनी पड़ेगी जो कि रिफंडेबल होगी.

>> फास्टैग अकाउंट खत्म करते वक्त यह पैसा आपको वापस दे दिया जाएगा. अकाउंट को आप क्रेडिट, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से भी रीचार्ज कर सकते हैं. मिनिमम रीचार्ज अमाउंट 100 रुपये और मैक्सिमम 100000 रुपये है. FASTag का एक वेब पोर्टल भी जिससे आप अपना अकाउंट ट्रैक कर सकते हैं.

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