सिख समुदाय को विश्व शान्ति नोबल प्राइज़ मिले : प्रेम गर्ग

गुरदासपुर (गगनदीँप सिँह) हर तरह की कठिन परिस्थितियों के दौरान, दुनिया भर में, हर इंसान को मुफ्त भोजन (लंगर) और आश्रय प्रदान करने में मानव जाति के लिए अपनी अनुकरणीय सेवाओं के लिए, शांति के लिए, भारत सरकार को सिख समुदाय को नोबेल प्राइज़ देने की सिफारिश करनी चाहिए।उनके धार्मिक स्थलों की स्वच्छता और उनके सेवाभाव की विनम्रता, गुरुद्वारों में सामुदायिक रसोई और जूता रखने की व्यवस्था अनुकरणीय है।

दुनिया के किसी भी कोने में, किसी भी जाति, पंथ, धर्म या लिंग के भेद के बिना, किसी की भी दर्द या कठिनाई में मदद करने के लिए सिख हमेशा सबसे पहले आगे आते हैं।

किसी सिख का किसी भी औरत के सामूहिक बलात्कार (Gang Rape) में शामिल होना लगभग नामुमकिन है। महिलाओं के खिलाफ अत्याचार जैसे जघन्य अपराधों में सिखों का शामिल होना दुर्लभ है। इतिहास में शायद ही ऐसी कोई घटना हो जब किसी युद्ध के समय, देश के वंटवारे के समय, या किसी दंगो के समय, सिखों ने किसी दूसरे धर्म की महिलाओं की बेअदबी की हो। आप किसी आपतिकाल में अपनी बेटी या बहन को किसी सिख परिवार में बेख़ौफ़ होकर उनकी पनाह में छोड़कर जा सकते हैं।उसकी इज्जत महफ़ूज़ रहेगी।

ये साधारण दिखने वाले लोग हमेशा अपने खराब नेतृत्व के बावजूद भी समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं।

सिख समुदाय के लिए यह सही समय है कि वह अपने संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी द्वारा उपदेशित शुद्ध भक्ति, शांति और सेवा की ओर बढ़ें।

मेरा भारत सरकार को ये अनुरोध, 1984 में सिखों के ख़िलाफ़ दंगे और हरमंदिर साहिब में भारतीय फ़ौज की करवाई की टीसों पर मरहम का काम करेगा। हरमंदिर साहिब में रखा शान्ति पुरस्कार भारत को सदियों तक गोरान्वित करेगा।

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