हरिद्वारः हरकी पैड़ी पर गिरी आकाशीय बिजली, ब्रह्मकुंड के ऊपर की दीवार गिरी

हरिद्वार, हरिद्वार के हरकी पैड़ी पर आकाशीय बिजली गिरने से सदियों पहले बनी हरकी पैडी के ब्रहृमकुंड के ऊपर की दीवार तेज आवाज के साथ गिर गई। आवाज होते हरकी पैड़ी और आसपास के लोगों की नींद खुली और उस ओर दौड़े। कई मीटर लंबी बाउंड्री वाल जो 1935 में बनाई गई थी, जमींदोज हो चुकी थी। जंगल में आग की तरह ये खबर देश के कोने—कोने तक पहुंची। कुशलक्षेम पूछने के लिए लोगों के फोन तक घनघनाने लगे। 

हरकी पैड़ी का हाल जानने को लोग बेचैन दिखे। बस, गनीमत यह रही कि सोमवती स्नान पर कोराना महामारी के लॉकडाउन और स्नान प्रतिबंधित करने से कोई यात्री रात में हरकी पैड़ी और आसपास मौजूद नहीं था, वरना बड़े हादसे इंकार नहीं किया जा सकता था। 

हरकी पैड़ी पर आकाशीय बिजली गिरने और नुकसान का आंकलन करने के लिए श्री गंगा सभा के पदाधिकारी सहित तीर्थ पुरोहित बड़ी तादाद में पहुंचे। हरकी पैड़ी पर दीवार गिरने का दृष्य देखकर ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि यहां पर श्रद्धालु होते तो निश्चित तौर पर बड़ी दुर्घटना होती। ​फिलहाल हरकी पैडी पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी सहित नगर निगम के अफसर पहुंच चुके हैं। हालात का जायजा ले रहे हैं। मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। बताया जाता है कि सुबह करीब साढे तीन बजे तेज बारिश के बीच आकाशीय बिजली एक जनरेटर पर गिरी और तेज धमाके के साथ ही सदियों पुरानी दीवार ढह गई।

श्री गंगा सभा के पदाधिकारी सिद्धार्थ चक्रपाणि, तीर्थ पुरोहित उज्जवल पंडित का कहना है कि जान—माल का कोई नुकसान नहीं हुआ है। हरकी पैड़ी पर दैनिक धर्म- कर्म चल रहा है। किसी को डरने और घबराने की जरूरत नहीं है। 

तीर्थ पुरोहित और प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी का कहना है कि आपदाएं बहुत आई लेकिन हरकी पैडी को कभी ऐसा नुकसान नहीं पहुंचा। कहते हैं कि हरकी पैड़ी के युगों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। इसे गंगा मइया की नाराजगी के रूप में देखने की जरूरत है।

उनकी मानें तो प्रशासन ने सोमवती स्नान पर रोक लगा दी। न संवत पर, न श्रावण मास में, न वैशाखी पर गंगा पूजन करने दिया गया। प्रशासन और यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वे सोशल डिस्टेसिंग का पालन कराते हुए इस व्यवस्था को किस तरह से सुचारू रख सके। उनकी मानना है कि गंगा के सम्मान को जो ठेस पहुंचाया जा रहा है, उसी का ये परिणाम है।

हरकी पैड़ी पर आकाशीय बिजली गिरने के बाद एक बार फिर राजनीति चर्चा उफान मारने लगी है। आकाशीय बिजली गिरने की घटना को जहां तीर्थ—पुरोहित मां गंगा की नाराजगी से जोड़ कर देख रहे, वहीं ये भी अब फिर कहा जाने लगा है कि गंगा को नहर में तब्दील करने के शासनादेश से जो गलत कार्य किया गया है, उससे मां गंगा नाराज हैं।

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की गदृदी मां गंगा में छीन ली। अब वे प्रायश्चित कर रहे। अब सरकार बीजेपी की है त्रिवेन्द्र सरकार इस पर निर्णय नहीं ले रही। लोग ये कह रहे हैं कि कहीं ऐसा तो नहीं ये घटना कोई संकेत भर है, कोई बड़ी आपदा तो नहीं आने वाली। कहते हैं कि मां गंगा को स्कैप चैनल के शासनादेश से मुक्त करने की जरूरत है।

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