मस्जिद में RSS प्रमुख डॉ मोहन भागवत का मंथन, जानें क्‍या है इसकी वजह

Delhi, संघ प्रमुख डॉ मोहनराव भागवत लगातार मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मिल रहे हैं. आज यान‍ी गुरुवार सुबह सरसंघ चालक भागवत ने कस्तूरबा गांधी मार्ग पर मौजूद मस्जिद में डॉ इमाम उमेर अहमद इलियासी (चीफ़ इमाम) सहित कई मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाक़ात की.

माना जा रहा है कि देश के माहौल में जिस तरह से कुछ ताकतें लगातार नफरत फैलाने का काम कर रही है उसे रोकने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ लगातार सक्रिय है. कर्नाटक के कॉलेज से हिजाब का मामला उठने के बाद पूरे देश में ये मुद्दा गरमा गया. अभी इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में बहस भी चल रही है और एजेंसियों की जांच में खुलासा हुआ है कि PFI ने साज़िश के तहत इस मुद्दे को हवा दी है.

इससे पहले भी जब ज्ञानवापी मस्जिद का मुद्दा गर्म हुआ था तब भी पिछले महीने अगस्त में संघ प्रमुख भागवत ने कुछ प्रमुख मुस्लिम शिक्षाविद और बुद्धिजीवियों के साथ मीटिंग की थी.

इस तरह की बड़ी पहल संघ की तरफ़ से तब हुई थी जब राम मंदिर पर फैसला आने वाला था, उससे पहले ही संघ देश की एकता और हालातों में जहर ना घुले इसके लिए सक्रिय हो गया था और पूरे देशभर के प्रमुख बुद्धिजीवियों से संघ के वरिष्ठ प्रचारकों ने मुलाक़ात की और इस बात के लिए तैयार किया था कि फैसला किसी के भी हक में आए उसको सभी को शांति से मानना होगा.

2019 में भागवत से अरशद मदनी की मुलाक़ात भी काफ़ी चर्चा में रही थी हालांकि संघ कई मौक़ों पर स्पष्ट कर चुका है कि देश में रहने वाले लोगों की पूजा पद्धति कोई भी हो लेकिन राष्ट्रवाद हर किसी के दिल में होना चाहिए. इस मीटिंग में सहसर कार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल और वरिष्ठ प्रचारक इन्द्रेश कुमार, रामलाल और हरीश कुमार साथ में थे.

संघ प्रमुख के मस्जिद के बाद मदरसे में जाने को एक बड़ी पहल के तौर पर माना जा रहा है. क्योंकि आज एक तरफ सुबह से ही पीएफआई के 100 से ज़्यादा पदाधिकारियों को NIA और ईडी की संयुक्त छापेमारी में गिरफ़्तार किया गया है. इसके बाद बड़ी संख्या में मुस्लिम विरोध में सड़कों पर उतरा है. वहीं, दूसरी तरफ संघ प्रमुख मस्जिद और मदरसों का दौरा कर रहे हैं. इससे साफ है कि संघ नफरत की फसल को किनारे रख देश के सभी समुदायों में राष्ट्रवाद की अलख का संदेश देने की पहल पर काम कर रहा है. भागवत के इस दौरे और मुलाकात पर संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक समाज जीवन के विभिन्न प्रकार के लोगों से मिलते रहते हैं, यह भी इसी सतत चलने वाली संवाद प्रक्रिया का हिस्सा है.

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