जहरीली हवा की जद में यूपी के आठ शहर बुलंदशहर, गाजियाबाद और नोएडा का भी नाम

ग्रेटर नोएडा : यूपी के कुछ शहरों को बेहद खतरनाक अंदाज में अपनी गिरफ्त में ले लिया है। मुरादाबाद समेत प्रदेश के आठ शहरों की हवा मंगलवार को बेहद जहरीली दर्ज हुई। ये शहर वायु प्रदूषण के सबसे खतरनाक स्तर मैरून जोन में आ गए। अन्य राज्यों की तुलना में यूपी के इन शहरों में वायु की गुणवत्ता का स्तर 400 से ऊपर रिकार्ड किया गया।

प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत आठ शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक मंगलवार को सुबह चार सौ से ऊपर रिकार्ड होने के चलते वायु प्रदूषण की स्थिति खतरनाक स्तर पर दर्ज की गई। सबसे ज्यादा जहरीली हवा कानपुर की दर्ज हुई। कानपुर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 460 पहुंच गया। कानपुर को देश का सबसे अधिक वायु प्रदूषित शहर रहा, जबकि, 451 एक्यूआई के साथ मेरठ दूसरे और 443 एक्यूआई के साथ मुरादाबाद वायु प्रदूषण के मामले में देश में तीसरे नंबर पर रहा। मुरादाबाद का सोमवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 482 रिकार्ड किया गया था, जोकि पूरे देश में सबसे अधिक था। 

प्रदेश के अन्य शहर जिनका वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से ऊपर रिकार्ड किया गया उनमें बुलंदशहर का एक्यूआई 439, गाजियाबाद का 432, ग्रेटर नोएडा का 416, नोएडा का 405 और लखनऊ का 404 रहा। इन सभी शहरों की हवा में जहरीले महीन कणों की मात्रा निर्धारित मानक से सात से नौ गुना तक अधिक दर्ज की गई।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से संचालित एप पर दर्ज प्रदूषण के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के इन आठ शहरों और बिहार के मुजफ्फरपुर को छोड़कर देश के अन्य सभी प्रमुख शहरों का एक्यूआई चार सौ से नीचे रहा। दिल्ली का एक्यूआई 365, गुरुग्राम का 366, जयपुर का 170, गुजरात के अहमदाबाद का 145 और गांधीनगर का सिर्फ 95 रहा।

बारिश या तेज हवा से ही राहत संभव
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अधीन मुरादाबाद में संचालित नेशनल एयर मॉनिटरिंग प्रोग्राम की प्रभारी डॉ. अनामिका त्रिपाठी ने बताया कि प्रदूषणकारक गतिविधियों की अधिकता के साथ ही अधिक ठंड, हवा की रफ्तार में कमी, कोहरा और धुंध इन शहरों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब होने के कारण के रूप में सामने आ रहा है। बारिश होने पर या फिर हवा की रफ्तार काफी तेज होने से ही प्रदूषण की मौजूदा स्थिति में सुधार आ सकता है।

सेहत पर खतरनाक जहरीली गैसों का चैंबर
जिला अस्पताल के चेस्ट फिजीशियन डॉ. प्रवीण शाह का कहना है कि कम तापमान के साथ एक्यूआई का अधिक रहना किसी एक जगह पर जहरीली गैसों और प्रदूषित कणों का चैंबर बन जाने की स्थिति है। यह स्थिति सांस के मरीजों के लिए बहुत खतरनाक है। ठंड में एक्यूआई खराब होने के चलते अस्थमा और फेफड़ों की गंभीर बीमारी सीओपीडी से पीड़ित मरीजों की समस्या बढ़ गई है। डॉक्टरों ने ऐसे मरीजों को बिना मास्क के बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है।

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