2022 : रक्षाबंधन पर इस शुभ मुहूर्त में भाई की कलाई पर बांधे राखी, ‘भद्रा काल’ है अशुभ समय

हाइलाइट्स

रक्षाबंधन का पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा.
11 अगस्त को रात्रि 8 बजकर 26 मिनट से 10 बजकर 15 मिनट तक शुभ समय है.
12 अगस्त की सुबह 7 बजकर 5 मिनट से पहले राखी बांधी जा सकती है.

 सावन (Sawan 2022) मास की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) का त्योहार मनाया जाता है. भाई बहन के प्यार के इस पवित्र पर्व पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनसे अपनी रक्षा का वचन लेती हैं. इस बार रक्षाबंधन का पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा, लेकिन 12 अगस्त की सुबह 7 बजे तक बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं. बीएचयू (BHU) के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर डॉ सुभाष पांडेय ने बताया कि 11 अगस्त की सुबह 10 बजकर 38 मिनट से पूर्णिमा तिथि की शुरुआत होगी. पूर्णिमा तिथि के शुरू होने के साथ ही भद्रा काल भी शुरू हो जाएगा जो कि रात्रि 8 बजकर 25 मिनट तक होगा.

डॉ सुभाष पांडेय के मुताबिक, रात्रि 8 बजकर 26 मिनट से 10 बजकर 15 मिनट तक का समय राखी बांधने के लिए सबसे शुभ है. हालांकि बहनें इसके बाद भी 12 अगस्त की सुबह 7 बजकर 5 मिनट से पहले भी भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं. इसमें किसी तरह का कोई दोष नहीं है.

भद्रा काल में नहीं बांधे राखी
ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर डॉ विनय पांडेय ने बताया कि रक्षाबंधन एक शुभ त्योहार है, इसलिए इसमें भद्रा काल में बहनों को राखी बांधने से परहेज करना चाहिए. पूर्णिमा तिथि के प्रारंभ होने के बाद रात्रि 8 बजकर 25 मिनट तक भद्रा काल है. इस समय में बहनों को भूलकर भी भाइयों की कलाई पर राखियां नहीं बांधनी चाहिए.

रक्षा बंधन पर राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त
11 अगस्त (गुरुवार): रात्रि 8 बजकर 26 मिनट से 10 बजकर 15 मिनट तक.

भद्रा काल का समय
11 अगस्त गुरुवार सुबह 10 बजकर 38 मिनट से रात्रि 8 बजकर 25 मिनट तक.

क्यों नहीं बांधी जाती भद्रा काल में राखी?

सबसे पहले तो हम ये जान लेते हैं कि, भद्राकाल में भाई की कलाई पर राखी क्यों नहीं बांधी जाती है। दरअसल, भद्राकाल में राखी न बांधने के पीछे की वजह बताई जाती है कि, इस समय को अशुभ माना जाता है। ऐसे में भाई के कलाई पर भद्र काल में राखी नहीं बांधी जाती। वही पौराणिक कथा के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य और छाया की पुत्री है। ऐसे में भद्रा शनिदेव की बहन हुई। कहा जाता है कि जब भद्रा का जन्म हुआ तो वह सारी सृष्टि को नष्ट करने वाली थी और साथ ही पूजा-पाठ, यज्ञ और हवन जैसे सारे मांगलिक कार्यों को में विघ्न डालती थी। यही वजह है कि भद्र काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता और विशेषकर इस समय भाई को राखी नहीं बांधनी चाहिए।

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