सेंसर की मदद से सब्जियां उगाएं, घरेलू इस्तेमाल के तेल से बन रहा बायोडीजल

लखनऊ, वो नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बन चुके हैं। कोई घर में महंगी सब्जियां उगाने में सेंसर का इस्तेमाल कर रहा है तो कोई घरेलू इस्तेमाल हो चुके तेल से बायोफ्यूल बना रहा है तो कोई लाखों मीट्रिक टन पानी बचा कर सोलर पैनल साफ करने की मशीन बना चुका है। ये सब प्रदेश के स्टार्टअप हैं…जिन्हें सरकार कॉमर्शियल लांच के लिए पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का फैसला कर चुकी है। अभी तक सरकार 17 स्टार्टअप को कॉमर्शियल लांच के लिए मदद दे चुकी है। जिन स्टार्टअप को मदद जा रही है वे प्रदेश में स्थापित इंक्यूबेटर की मदद से कॉमर्शियल लांच की स्टेज तक पहुंचे हैं।

लखनऊ के विवेक कुमार व अंश शुक्ला का स्टार्टअप ‘मैटफ्यूजन वेल्ड प्राइवेट लिमिटेड’ खाना पकाने के तेल को जैव-ईंधन में परिवर्तित करने की अवधारणा पर काम कर रहा है। वे पंचसितारा होटलों व रेस्टोरेंट से बचा तेल इकट्ठा करते हैं और इण्डियन ऑयल को देते हैं। इस तेल को डीजल में ब्लेण्डिंग के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका इस्तेमाल बायोडीजल बनाने में किया जाएगा। इनका लखनऊ के 25 से 30 बड़े होटलों व रेस्टोरेंट के साथ करार है। स्टार्टअप ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को बायोफ्यूल की आपूर्ति के लिए 10 साल का अनुबंध किया है। इस स्टार्टअप के तहत अगले वित्तीय वर्ष में लगभग 100 रोजगार सृजित करने की योजना है।

छतों पर लाल-पीली शिमला मिर्च, ब्रोकली जैसी आर्गेनिक सब्जियां उगाना किसे नहीं पसंद होगा लेकिन इन्हें उगाना आसान नहीं। अब आशीष कुशवाहा ने इसे आसान बनाया है। ग्रेटर नोएडा के जीसिस्टम्स स्मार्ट फार्मिंग में लोगों की मदद कर रहा है। मशीन लर्निंग आधारित सेंसर के साथ इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर आधारित स्मार्ट फार्मिंग सिस्टम एक तरह से बागवानी के लिए आपका स्मार्ट गुरु है। ग्रीन हाउस में तापमान को बरकरार रखने के लिए इसने कई तरह के सेंसर बनाए हैं। यदि तापमान घटता-बढ़ता है या फिर नमी ज्यादा-कम है तो यह सेंसर मोबाइल पर एलर्ट भेजेगा।

उस स्कूल की कल्पना कीजिए जिसमें बच्चा क्लास में पहुंचे और टीचर कोई एटेंडेंस न ले। न कोई रजिस्टर और न प्रेजेंट-एब्सेंट के सुर… बहुत नायाब तो नहीं लेकिन ये आम स्कूल की अवधारणा से बाहर की चीज है। यूपी के सहारनपुर के कुमार सत्यम ने ऐसा ही स्टार्टअप भूरक टेक्नोलॉजीस शुरू किया है। इसमें बच्चों की अटेंडेंस फेस रिकग्नीशन से ही हो जाएगी। इससे उसकी स्कूल में एंट्री या एग्जिट को भी मॉनिटर किया जा सकेगा। आर्टीफिशियल इंटैलीजेंस पर आधारित इस स्टार्टअप से झगड़ा होने की स्थिति में उसमें शामिल सभी के नाम आदि जाने जा सकेंगे क्योंकि यह सीसीटीवी फुटेज में कैद सभी इमेज को स्कूल के डाटाबेस से सिंक कर देता है। सिर्फ छात्राओं के कॉलेजों में यह महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी इस्तेमाल हो रहा है। यूपी के चार शैक्षणिक संस्थानों ने इसे अपने यहां लगवाया भी है।

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