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20 करोड़ का GST स्कैम और ‘हवाला’ नेटवर्क का भंडाफोड़

यूपी के बरेली में फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले एक बड़े जीएसटी (GST) रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। क्राइम ब्रांच की एसआईटी (SIT) ने जाल बिछाकर मेरठ के रहने वाले मास्टरमाइंड योगेश शर्मा को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल के जरिए अब तक करीब 20 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) डकार चुका है।

गाजियाबाद के पॉश अपार्टमेंट से हुई गिरफ्तारी

एसएसपी बरेली अनुराग आर्य के निर्देशन में गठित क्राइम ब्रांच की टीम ने बैंक ट्रांजेक्शन और साइबर एनालिसिस के आधार पर योगेश शर्मा को ट्रेस किया। पुलिस ने उसे गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित के.डी.पी. सवाना अपार्टमेंट के गेट से गिरफ्तार किया। योगेश मेरठ के परतापुर इलाके का रहने वाला है और पिछले कई सालों से इस संगठित अपराध को अंजाम दे रहा था।

खाली ट्रक और फर्जी कागजों का खेल

पुलिस की पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यह गिरोह कागजों पर तो माल की सप्लाई दिखाता था, लेकिन असल में गाड़ियां खाली चलती थीं। फर्जी रजिस्ट्रेशन के लिए गिरोह किराए की दुकानों का इस्तेमाल करता था और कुछ समय बाद वहां से पता बदल देता था ताकि जीएसटी विभाग की नजरों से बचा जा सके। फर्जी लेन-देन के पैसे को ठिकाने लगाने के लिए ‘हवाला’ नेटवर्क का सहारा लिया जाता था।

श्री श्याम ट्रेडर्स के नाम पर रचा 14 करोड़ का फ्रॉड

जांच में सामने आया कि योगेश शर्मा ने अपने साथियों मनीष अग्रवाल, गौरव अग्रवाल (निवासी बरेली), अपर्णा अग्रवाल और आदी उर्फ युगांश बिसारिया के साथ मिलकर बरेली में ‘श्री श्याम ट्रेडर्स’ नाम की एक फर्जी फर्म बनाई थी। सिर्फ इसी एक फर्म के जरिए करीब 14 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा पहुंचाया गया। इस मामले में राज्य कर अधिकारी अविनाश दीक्षित ने बिथरी चैनपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।

मोबाइल में मिला डिजिटल सबूतों का खजाना

गिरफ्तारी के दौरान योगेश के पास से सैमसंग एफ15 मोबाइल बरामद हुआ है। पुलिस को इसमें भारी मात्रा में फर्जी इनवॉइस, ई-वे बिल और व्हाट्सएप चैट मिली है। चैट से पता चला है कि यह गिरोह देश के विभिन्न राज्यों में अपनी फर्जी फर्मों का जाल फैलाए हुए था। मोबाइल डेटा इतना अधिक है कि अब पुलिस इसका फॉरेंसिक टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है।

पार्टनर पहले ही जा चुका है जेल

इस मामले में एसआईटी के मुख्य विवेचक निरीक्षक संजय कुमार धीर ने बताया कि गिरोह के एक अन्य सदस्य गौरव अग्रवाल को 25 जनवरी को ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब योगेश की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और हवाला कारोबारियों की तलाश में जुट गई है।

अपराधियों के लिए सख्त संदेश: एसएसपी अनुराग आर्य

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि-“जीएसटी चोरी और राजस्व की हानि पहुँचाने वाले किसी भी गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा। हमारी एसआईटी और क्राइम ब्रांच ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मेरठ के मुख्य अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। इस पूरे गिरोह ने फर्जी फर्मों का एक जाल बिछा रखा था, जिसका नेटवर्क कई जिलों और राज्यों में फैला है। अभियुक्त के मोबाइल से मिले डेटा और हवाला इनपुट के आधार पर हम इस सिंडिकेट की गहराई तक जा रहे हैं। इसमें शामिल अन्य अभियुक्तों और उनके मददगारों की गिरफ्तारी के लिए टीमें दबिश दे रही हैं। हमारी प्राथमिकता ऐसे संगठित आर्थिक अपराधों को जड़ से खत्म करने की है।”

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