ईरान के चाबहार पर अमेरिकी फाइटर जेट्स ने बरसाए बम
वॉशिंगटन: अमेरिका-ईरान युद्ध के 17वें दिन पश्चिम एशिया से दो बड़ी खबरें एक साथ सामने आईं. पहली, ईरान के चाबहार फ्री ट्रेड जोन के पास अमेरिकी लड़ाकू विमानों के हमले की रिपोर्ट, और दूसरी, अबू धाबी में एक नागरिक वाहन पर मिसाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत. इन दोनों घटनाओं ने यह संकेत दे दिया है कि अमेरिका-इजरायल की जंग अब सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं दिख रही. सोमवार सुबह खबर आई कि यूएई के प्रमुख शहर दुबई के एयरपोर्ट पर हमला हुआ. इस हमले से एयरपोर्ट के तेल डिपो का एक टैंकर तबाह हो गया.
अल जजीरा ने वॉयस ऑफ अमेरिका की फारसी सेवा के हवाले से बताया कि अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान के चाबहार फ्री ट्रेड जोन के पीछे एक पहाड़ी इलाके में मौजूद सेना की फैसिलिटी को निशाना बनाया. रिपोर्ट के मुताबिक हमले के बाद वहां जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं. फिलहाल नुकसान, हताहतों या ईरान की ओर से तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन सिर्फ चाबहार का नाम सामने आना ही इस खबर को बेहद अहम बना देता है.
भारत के लिए क्यों अहम है चाबहार पोर्ट?
ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर गल्फ ऑफ ओमान के किनारे स्थित चाबहार, ईरान का इकलौता ऐसा महासागरीय बंदरगाह है, जहां से बिना होर्मुज जलडमरूमध्य में दाखिल हुए सीधे हिंद महासागर तक पहुंच बनती है. यही इसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है. ऐसे वक्त में, जब होर्मुज के आसपास तनाव बना हुआ है, चाबहार का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यह समुद्री आवाजाही और ऊर्जा सप्लाई के लिए एक वैकल्पिक रास्ते की तरह देखा जाता है. भारत के लिए चाबहार की अहमियत और भी ज्यादा है. भारत ने मई 2024 में ईरान के साथ 10 साल का समझौता कर शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन की जिम्मेदारी ली थी. यह काम इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड के जरिए किया जा रहा है. इससे पहले भारत अल्पकालिक व्यवस्थाओं के तहत यहां काम कर रहा था. चाबहार भारत के लिए सिर्फ एक बंदरगाह नहीं, बल्कि एक रणनीतिक दरवाजा है, जो उसे पाकिस्तान को बायपास करते हुए ईरान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच देता है. यही नहीं, चाबहार को अक्सर पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के जवाब के तौर पर भी देखा जाता है, जिसे चीन का समर्थन हासिल है. ग्वादर और चाबहार के बीच दूरी बहुत ज्यादा नहीं है, इसलिए इस इलाके में कोई भी सैन्य हलचल सीधे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन से जुड़ जाती है.

