google-site-verification=aXcKQgjOnBT3iLDjEQqgeziCehQcSQVIW4RbI82NVFo
Latest

अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेला छोड़कर गए, कहा- बिना स्नान दुखी मन से लौट रहा हूं

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ​​​​​​प्रयागराज माघ मेला छोड़ दिया है। वह काशी के लिए रवाना हो गए हैं। इससे पहले, उन्होंने बुधवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं।

इस दुख की भरपाई पता नहीं कौन सा नेता आएगा कौन सी पार्टी आएगी जो करेगी। प्रयागराज हमेशा से आस्था और शांति की धरती रही है। श्रद्धा के साथ यहां आया था, लेकिन एक ऐसी घटना हो गई, जिसकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी।

उन्होंने कहा-

QuoteImage

कल मुझे माघ मेला प्रशासन की ओर से एक पत्र और प्रस्ताव भेजा गया। इसमें कहा कि मुझे पूरे सम्मान के साथ पालकी से संगम ले जाकर स्नान कराया जाएगा। मुझ पर फूल बरसाए जाएंगे, लेकिन मैंने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जब दिल में दुख और गुस्सा हो, तो पवित्र पानी भी शांति नहीं दे पाता।QuoteImage

माघ मेला 15 फरवरी तक चलेगा। अभी 2 स्नान बचे हैं। माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) और महाशिवरात्रि (15 फरवरी)। यानी विवाद के कारण शंकराचार्य ने माघ मेला 18 दिन पहले ही छोड़ दिया। मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य का प्रशासन से विवाद हुआ, फिर वे बिना स्नान किए लौट गए। इसके बाद उन्होंने बसंत पंचमी के दिन भी स्नान नहीं किया था। अब वे बाकी दोनों स्नान में भी शामिल नहीं होंगे।

शंकराचार्य की 4 बड़ी बातें–

1- घटना ने मेरी आत्मा को झकझोर दिया

शंकराचार्य ने कहा- इस घटना ने मेरी आत्मा को झकझोर दिया। इससे न्याय और मानवता के प्रति मेरा विश्वास कमजोर हुआ है। मैंने कुछ समय का मौन रखकर प्रार्थना भी की कि जिन लोगों ने अपमान किया है, उन्हें दंड मिले। मेरे सम्मान को ठेस पहुंचाने का प्रयास हुआ। इसके पीछे राज्य सरकार जिम्मेदार है।

2- प्रस्ताव में प्रशासन ने घटना के लिए माफी नहीं मांगी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- प्रशासन के कल के प्रस्ताव में मौनी अमावस्या की घटना के लिए माफी नहीं मांगी गई। असली सम्मान तब होता है, जब गलती मानी जाए और सच्चे मन से माफी मांगी जाए। जब तक मूल घटना की जिम्मेदारी लेकर दोषी लोग माफी नहीं मांगते, तब तक ऐसे किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करूंगा। अगर मैं उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता, तो उस दिन हुई घटना और उनके भक्तों के अपमान का मुद्दा दब जाता।

3-किसकी जीत हुई, यह समय बताएगा

शंकराचार्य ने कहा- मैं इस मामले को लेकर कई दिनों तक विरोध में बैठा रहा, लेकिन फिर मेला छोड़ने का फैसला किया। अगर पहले पालकी से स्नान कराना गलत माना गया, तो अब वही बात सही कैसे हो गई? क्या संतों, संन्यासियों और ब्रह्मचारियों के साथ हुई मारपीट और अपमान की भरपाई ऐसे ही कर दी जाएगी?

मैं इस तरह के दिखावे वाले सम्मान को कभी स्वीकार नहीं कर सकता। किसकी जीत हुई और किसकी हार हुई, यह समय बताएगा। फैसला सनातनी समाज करेगा। जो मुगलों के समय हुआ था, वही आज हो रहा है। इन 11 दिनों में हमारी प्रतिष्ठा की हत्या का प्रयास हुआ।

4-जिन्होंने अपमान किया, उन्हें औकात दिखानी होगी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- अगर यह केवल स्थानीय प्रशासन करता, तो बात अलग होती, लेकिन इसके पीछे उत्तर प्रदेश का शासन है। हमने पहले भी कहा था कि इस अन्याय के प्रतिकार के लिए आगे भी आंदोलन किया जाएगा। अगर सनातनी चाहेंगे, तो हम शांत नहीं बैठेंगे। मेरी युवाओं से अपील है कि जिन्होंने सनातनी प्रतीकों का अपमान किया है, उन्हें उनकी औकात दिखानी होगी।

अब तक क्या हुआ, जानिए—

  • 18 जनवरी को माघ मेले में स्नान के लिए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद की पुलिस ने पालकी रोकी। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई, शिखा पकड़कर घसीटने का आरोप लगा। इसके बाद शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। 11दिनों से शिविर में प्रवेश नहीं किया।
  • प्रशासन ने दो दिनों में दो नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा, जिनका अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया। सीएम योगी ने बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ कहा, जिससे विवाद और गहरा गया। जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी की तुलना कालनेमि और औरंगजेब से कर दी।
  • शंकराचार्य विवाद पर संत समाज दो हिस्सों में बंट गया, जबकि तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में थे। शंकराचार्य की मांग थी कि प्रशासन माफी मांगे, तभी वह स्नान करेंगे। शंकराचार्य के समर्थन में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने 26 जनवरी को इस्तीफा दे दिया। 24 घंटे बाद सीएम के समर्थन में अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार ने रिजाइन कर दिया।
Umh News india

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *