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एटा : थाने से लौटे युवक की मौत, शरीर पर गहरे जख्म

यूपी के एटा में 17 साल के नाबालिग का शव घर से 500 मीटर दूर मिला। परिजनों के मुताबिक, उसे एक लड़की को भगाने के आरोप में पुलिस ने थाने बुलाया था। शुक्रवार को वह बड़े भाई और मामा के साथ थाने पहुंचा, लेकिन पुलिसवालों ने बड़े भाई और मामा को भगा दिया।

इसके बाद रातभर बेटे को थाने में बंद कर पीटा गया। हालत बिगड़ने पर सुबह गांव से 500 मीटर दूर छोड़ दिया गया, जहां उसकी मौत हो गई। नाबालिग की मौत के बाद भारी संख्या में ग्रामीण जुट गए। शव को ट्रैक्टर में रखकर एसएसपी कार्यालय पहुंच गए और हंगामा कर दिया। इसकी सूचना मिलते ही एएसपी राजकुमार सिंह मौके पर पहुंचे।

उन्होंने जांच कर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया और दो दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। मामला निधौली कलां थाना क्षेत्र के चंद्रभानपुर गांव का है। घटना से जुड़े वीडियो सामने आए हैं, जिनमें मां और बहन रो-रोकर बेसुध हो रही हैं। बहन कह रही है- भइया कहां चले गए?

विधायक ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद देने की मांग की है। वह पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे, जहां मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। परिवार ने सरकार से बीस लाख रुपए की आर्थिक सहायता की मांग की, जिसे विधायक ने उचित बताते हुए प्रशासन से जल्द मदद दिलाने का भरोसा दिलाया।

सत्यवीर (17) जयपुर में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था। उसके भाई ओमकार सिंह ने बताया- होली की बात है, जब गांव के ही बृजेश की लड़की को कोई भगा ले गया था। इसके बाद बृजेश ने गांव के चार-पांच लोगों पर आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की, जिसमें सत्यवीर का भी नाम शामिल करवा दिया।

इसी सिलसिले में पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए बुलाया था। 31 जुलाई को उसे जयपुर से बुलाया गया। जब वह शाम को घर पहुंचा तो पुलिसवालों ने शुक्रवार सुबह थाने आने को कहा। 1 अगस्त की सुबह 8 बजे सत्यवीर अपने बड़े भाई योगेंद्र और मामा के साथ थाने गया था। पुलिस ने योगेंद्र और मामा को भगा दिया। पूछताछ के नाम पर पुलिस ने सत्यवीर के साथ मारपीट की। उसके पूरे शरीर पर चोट के निशान हैं।

परिजनों का आरोप है कि पुलिसवालों ने उसे बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी मौत हो गई। रातभर उसे थाने में रखा गया और सुबह 6 बजे गांव से करीब 500 मीटर दूर उसका शव सड़क किनारे मिला। सत्यवीर की मौत की खबर फैलते ही आसपास के लोग जुट गए।

परिजन शव को ट्रैक्टर में रखकर एसएसपी कार्यालय पहुंच गए। यहां गेट के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हंगामा बढ़ते देख एएसपी राजकुमार सिंह मौके पर पहुंचे और परिजनों से बातचीत की। परिजन शव को पुलिस को सौंपने से इनकार कर रहे थे। काफी समझाने के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।

मृतक के परिजनों ने थाना अध्यक्ष राजकुमार सिंह, दरोगा सुरेन्द्र यादव, दरोगा आसिफ अली, सिपाही दिलीप यादव और पुष्पेंद्र के खिलाफ थाने में तहरीर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन पुलिसकर्मियों की पिटाई से ही युवक की मौत हुई है। परिजनों ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराए जाने की मांग करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

SSP श्याम नारायण सिंह ने बताया कि मार्च में एक लड़की गायब हुई थी, जिसकी जांच चल रही है। इस मामले में कई लोगों से पूछताछ की गई थी। संदेह के आधार पर सत्यवीर को भी थाने बुलाया गया था। वह अपने भाई और एक वकील के साथ थाने आया था। पूछताछ के बाद उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था।

परिजनों का आरोप है कि थाने में पुलिस ने सत्यवीर के साथ मारपीट की, जिससे उसकी मौत हो गई। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाए गए तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में दरोगा सुरेंद्र सिंह यादव, दरोगा आसिफ अली और तीन अज्ञात पुलिसकर्मियों पर आरोप लगे हैं। फिलहाल, दोनों दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

Umh News india

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