google-site-verification=aXcKQgjOnBT3iLDjEQqgeziCehQcSQVIW4RbI82NVFo
Crime News

50000 दो, नहीं तो जेल में सड़ोगे…कहने वाला इंस्पेक्टर अरेस्ट

गाजियाबाद के निवाड़ी थाने के इंस्पेक्टर जयपाल सिंह रावत को विजिलेंस टीम ने अरेस्ट कर लिया। उनके पास से रिश्वत के 50 हजार रुपए भी मिले।

इसके बाद उन्हें कस्टडी में लेकर उनके थाने से विजिलेंस टीम लेकर गई। दरअसल, पूर्व प्रधान ने उन्हें जो रिश्वत के 50 हजार रुपए दिए थे, इंस्पेक्टर ने उन्हें अपनी जेब में रख लिए थे।

वह ऑफिस में ही बैठे थे, इसी दौरान विजिलेंस टीम पहुंची। उन्हें रंगे हाथ अरेस्ट कर लिया। वह 2013 बैच के दरोगा हैं, जो एक साल पहले ही इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन मिला था। इससे पहले हापुड़ में सर्विलांस में तैनात रह चुके हैं

गाजियाबाद के निवाड़ी थाना क्षेत्र के अबुपुर गांव में रहने वाले राकेश कुमार उर्फ बिट्‌टू गांव में 2000 से 2005 तक प्रधान रहे। पूर्व प्रधान की पत्नी हापुड़ के हाफिजपुर में सरकारी टीचर हैं।

पूर्व प्रधान ने बताया- 2 जनवरी, 2026 को मेरे खिलाफ एक केस पुलिस ने दर्ज किया। यह केस मेरे खिलाफ विजय सिंह ने लिखाया कि मैं मैंने सीएम और पीएम के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है।

2 तारीख की शाम 4 बजे घटना दिखाई गई, उस समय मैं SBI बैंक में था। मैंने कहा कि मेरी लोकेशन देखी जाए। CCTV चेक की जाए। मैंने किसी भी ग्रुप में कुछ नहीं लिखा। मेरी गांव के विजय सिंह से चुनावी रंजिश चल रही है। मेरे खिलाफ साजिश करते हुए मुकदमा दर्ज किया गया है।

इसके बाद इंस्पेक्टर जयपाल रावत ने कहा- तुझे जेल भेज दूंगा, नहीं तो 50 हजार रुपए दो। FIR हुई है, तो कुछ तो लिखना होगा। पूर्व प्रधान ने कहा- मेरे खिलाफ जो केस दर्ज किया था, उसमें साक्ष्य नहीं थे। मैं ACP मोदीनगर से मिला। DCP देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी से मिला। उच्च अधिकारियों से मिला। मेरी पत्नी बबीता रानी ने अपने नाम से शिकायत पत्र दिया। मुझे आश्वासन देते रहे कि जांच कराएंगे।

इंस्पेक्टर खुद मेरे घर दबिश देने पहुंच गए। मुझे जेल भेजने के नाम पर इतना टॉर्चर किया कि मेरी कोई सुनवाई नहीं हुई। एक महीने से मैं अधिकारियों के चक्कर काट रहा हूं। 1 फरवरी को इंस्पेक्टर मेरे घर पर दबिश देने पहुंच गए। मुझे जेल भेजने के नाम पर गालियां दीं।

थक हारकर मैंने मेरठ विजिलेंस में शिकायत की। इसके बाद वहां के अधिकारियों ने एक टाइम निश्चत करके कहा कि ठीक है, आप जाकर रिश्वत दीजिए, बाकी हम लोग देख लेंगे।

मैंने 50 हजार रुपए इंस्पेक्टर को उनके ऑफिस में दे दिए। इसके बाद टीम के अधिकारी मौके पर पहुंचे गए और इंस्पेक्टर को पकड़ लिया। पीड़ित प्रधान ने बताया- 10 दिसंबर को जिले के प्रभारी मंत्री असीम अरुण का कार्यक्रम भी कराया। लाइब्रेरी उदघाटन कराया था, मेरे मकान के चारों तरफ कैमरे लगे हैं, बोर्ड उखाड़ने का आरोप लगाया। जिस समय की घटना दिखाई गई, उस समय की मेरी लोकेशन बैंक की थी।

इंस्पेक्टर कहते थे कि बिना मेरे आदेश के आईओ नाम नहीं निकालेगा, अगर पैसे नहीं दिए, तो चाहे एक दिन के लिए शांतिभंग में जेल भेजूं, जेल जरूर भेजूंगा।

Umh News india

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *