बुलंदशहर की कुसुम कैसे बनी दिल्ली की ड्रग क्वीन, 8 करोड़ की प्रॉपर्टी
इस घर से नशे का सामान बेचा जाता था। शहर के बाहर से भी लोग खरीदने आते थे। कई बार तो हमने यहां हरियाणा और UP के नंबर वाली गाड़ियां भी देखी हैं। ये सभी ड्रग्स लेने आते थे। यहां रहने वाले सभी इससे परेशान हैं।‘
दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में ड्रग डीलर कुसुम के आस-पास रहने वालों की यही शिकायत है। उसके खौफ की वजह से कोई कैमरे पर आने को राजी नहीं हुआ। उसके धंधे की वजह से बिगड़े माहौल से सब परेशान हैं।
सुल्तानपुरी में कुसुम का पांच मंजिला मकान है। यहीं से वो ड्रग सप्लाई का पूरा नेटवर्क चलाती थी। उसने पुलिस से बच निकलने के लिए यहां खुफिया रास्ता बना रखा है। निगरानी के लिए रास्तों पर 20 CCTV कैमरे भी लगाए हैं।
पुलिस को इसके धंधे के बारे में तब भनक लगी, जब सुल्तानपुरी और मंगोलपुरी इलाके में पकड़े गए कुछ ड्रग पैडलर्स ने इसका नाम लिया। इसके बाद पुलिस ने 10 मार्च को उसके ठिकाने पर छापा मारा और जांच आगे बढ़ी। पुलिस ने उसके बेटे अमित को अरेस्ट कर लिया, लेकिन कुसुम बच निकली। बेटे से पूछताछ के बाद 19 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने कुसुम की 4 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी जब्त कर ली है।
कुसुम कब और कैसे इस धंधे से जुड़ी। उसके ड्रग सप्लाई का कारोबार कहां तक फैला है। उसके मकान से कैसे ड्रग्स बेचा जाता था। ये जानने के लिए हम दिल्ली के सुल्तानपुरी पहुंचे। हमने इलाके के लोगों और पुलिस से बात की।
इलाके के एक और दुकानदार बताते हैं, ’कई बार ड्रग्स लेने वालों से यहां सड़क पटी रहती थी। कई बार पुलिस को हटाने आना पड़ जाता था। फिर सब कुछ नॉर्मल हो जाता। आप ही सोचिए प्रशासन के सहयोग के बिना इतना बड़ा काम कैसे चल सकता है। कुसुम अकेली नहीं, पूरी फैमिली और आसपास के लोग इसमें इन्वॉल्व हैं। बेटा अमित बेल मिलने के बाद आया भी था।’
56 साल की कुसुम उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के बनैल गांव की रहने वाली है। पुलिस डोजियर के मुताबिक, बहुत कम उम्र में उसकी शादी अलीगढ़ में सुरेंद्र उर्फ राजू से कर दी गई। सुरेंद्र दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में काम करता था। शादी के बाद कुसुम भी पति के साथ सुल्तानपुरी आ गई। कुछ समय बाद ही पति की बीमारी से मौत हो गई।
पुलिस अधिकारी ने बताया, कुसुम के पड़ोस में रहने वाला मनोज शराब बेचता था। कुसुम ने उससे दूसरी शादी कर ली। कुछ समय बाद मनोज भी बीमार रहने लगा तो परिवार के पास कमाई का कोई जरिया नहीं बचा। तब कुसुम, पति मनोज के जरिए ही एक ड्रग सप्लायर के कॉन्टैक्ट में आई और इस पेशे से जुड़ गई।
2003 में उसने सुल्तानपुरी के कई इलाकों में ड्रग्स बेचनी शुरू कर दी थी। 28 जून 2003 को उसके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत सुल्तानपुरी थाने में पहला केस दर्ज हुआ। इसके बाद एक के बाद केस से फाइल मोटी होती गई, दूसरी तरफ कुसुम का ड्रग्स का साम्राज्य भी बढ़ता चला गया। उसके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत कुल 12 केस दर्ज हैं।
पुलिस अधिकारी बताते हैं कि कारोबार बढ़ने के बाद कुसुम ने प्रॉपर्टीज बनानी शुरू कीं। सुल्तानपुरी में ही उसके 7 मकान हैं। इसके अलावा रोहिणी में भी कुछ मकान हैं, जिसकी पुलिस जांच कर रही है। ज्यादातर मकान किराए पर उठे हुए हैं।
सुल्तानपुरी के एक मकान के ग्राउंड फ्लोर से उसने एक खुफिया रास्ता बना रखा है। ये रास्ता उसके बगल के दूसरे मकान में फर्स्ट फ्लोर पर निकलता है, ताकि किसी इमरजेंसी के वक्त उसे भागने का मौका मिल सके।
कुसुम के पास एक फॉरच्यूनर गाड़ी है, जो उसने अपने नाम पर नहीं ली। अधिकारी बताते हैं, ‘कानूनी दिक्कतें होने के कारण कुसुम ने छोटी बेटी के बॉयफ्रेंड के नाम से ये सेकेंड हैंड फॉरच्यूनर गाड़ी ली है। एक स्कॉर्पियो भी है, वो भी दूसरे के नाम पर खरीदी गई है। इसके अलावा उसके पास एक स्विफ्ट डिजायर कार भी है।’
हमने पुलिस से कुसुम की कुल प्रॉपर्टी के बारे में पूछा तो जवाब मिला, ‘मकान और बाकी चीजों को जोड़कर करीब 7-8 करोड़ की प्रॉपर्टी हो सकती है। पुलिस के मुताबिक, जनवरी 2024 के बाद से अब तक दोनों बेटियों दीपा और चीकू के खातों में करीब 2 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए हैं।
दिल्ली पुलिस के दूसरे अधिकारी बताते हैं, ‘कुसुम यहां रोजाना एक लाख तक का कारोबार कर रही थी। वो ट्रामाडोल (पेन किलर जैसी दवाई) से लेकर हेरोइन और स्मैक तक बेचती थी। उसके खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। हमने अभी उसके 4 बैंक अकाउंट्स भी सीज किए हैं। उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी है। इसी महीने उसे भगोड़ा साबित करने के लिए भी कोर्ट में सुनवाई होगी।’
DCP बोले- ड्रग्स की सप्लाई में बच्चे भी शामिल आउटर दिल्ली के इलाकों में ड्रग सप्लाई में क्या बच्चे भी शामिल हैं? इस पर DCP सचिन शर्मा कहते हैं, ‘एक होता है कंज्यूमर पार्ट। निश्चित रूप से इसमें बच्चे शामिल हैं। कुछ जगहों पर ड्रग एडिक्शन के मामले आए हैं।
दूसरा है कुरियर साइड। इसमें भी हमने दो-तीन जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के मामले दिए हैं। जिससे पता चला है कि ड्रग्स की सप्लाई में बच्चों का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि कुसुम के मामले में ये अभी तक साबित नहीं हुआ है।’
DCP ने बताया कि अभी 8 प्रॉपर्टी की पुष्टि हो सकी है, जो कुसुम के नाम पर हैं। बाकी कुछ और प्रॉपर्टी की सूचनाओं पर पुलिस काम कर रही है। जैसे-जैसे जानकारी मिलेगी, पुलिस इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।