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प्रयागराज DM से केशव बोले-सतुआ बाबा की रोटी मत सेंको

डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने प्रयागराज डीएम की चुटकी ली। कहा- ये जो जाम लग रहा है, इसे देखो। सतुआ बाबा की रोटी के चक्कर में न पड़ो। यह सुनकर DM मनीष वर्मा और अफसर हंसने लगे।

दरअसल, डिप्टी सीएम सोमवार को माघ मेले की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे थे। संगम नोज पर उन्होंने व्यवस्थाओं की जानकारी DM और मेला अधिकारी से ली। कार में चढ़ते वक्त उन्होंने अफसरों को बुलाया।

डिप्टी सीएम ने एक पैर कार में, दूसरा पावदान पर रखा और गेट पकड़कर खड़े हो गए। अफसर उनके सामने खड़े थे। इसी दौरान उन्होंने नसीहत दी- कोई भी साधु-संत जमीन मांगे, तो उसे दिया जाए।

दरअसल, DM ने 6 दिन पहले सतुआ बाबा के आश्रम में चूल्हे पर रोटी सेंकी थी। इसका वीडियो खूब चर्चा में रहा। महाकुंभ के समय से सतुआ बाबा सीएम योगी के करीबी माने जाने लगे हैं।

कोट पहने DM ने चूल्हे पर रोटी सेंकी थी

  • 24 दिसंबर को DM मनीष कुमार वर्मा माघ मेला का निरीक्षण करने अफसरों के साथ पहुंचे। इस दौरान वह संतोषदास जी महाराज ‘सतुआ बाबा’ के कैंप में चले गए। यहां DM ने कोट पहने हुए चूल्हे पर रोटी बनाई। बगल में बैठे सतुआ बाबा उन्हें तरीका बता रहे थे।
  • इस बारे में सतुआ बाबा ने कहा था- DM और मेला अधिकारी कैंप में आए थे। उन्होंने साधु-संतों से कुशलक्षेम पूछा और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। वह भक्ति और सेवाभाव से ओतप्रोत दिखाई दिए। उन्होंने संतों के लिए चूल्हे पर रोटी भी पकाई।

वीडियो सामने आने के बाद जमीन आवंटन को लेकर प्रदर्शन कर रहे साधु-संतों ने डीएम पर तंज कसा। कहा- एक तरफ बड़ी संख्या में संत जमीन और सुविधाओं के लिए अफसरों के चक्कर काट रहे, दूसरी तरफ DM सतुआ बाबा के शिविर में रोटी सेंक रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि जैसे यह मेला सतुआ बाबा ही चला रहे।

3 पॉइंट में पढ़िए केशव का प्रयागराज दौरा

  • केशव ने सोमवार को सर्किट हाउस में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और अफसरों के साथ बैठक की। उन्होंने माघ मेले की तैयारियों का जायजा लिया। इससे पहले, उन्होंने संगम तट पर पूजा-अर्चना की। इस दौरान वहां माघ मेले की पेयजल, चिकित्सा और लाइटिंग व्यवस्था का निरीक्षण किया।
  • डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि माघ मेला को मिनी कुंभ की तर्ज पर तैयार किया जाए। केशव ने कहा कि 3 जनवरी तक माघ मेला से जुड़े सभी काम हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। जरूरत पड़ने पर अधिकारियों की संख्या बढ़ाई जाए, लेकिन किसी भी तरह की कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
  • उन्होंने कहा कि माघ मेला केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, सामाजिक अनुशासन और प्रशासनिक क्षमता का प्रतीक है। प्रमुख स्नान पर्वों पर विशेष सतर्कता बरती जाए और भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था के लिए ठोस इंतजाम किए जाएं।
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