सबसे महंगा गणपति पंडाल, 474 करोड़ का तो हुआ है बीमा
दिल्ली. देश भर में गणेश चतुर्थी का महापर्व हर साल बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इस बार पर्व 27 अगस्त को है. इसी दिन गणेश स्थापना की जाएगी. महाराष्ट्र खासकर मुंबई में मनाया जाने वाला गणपति उत्सव दुनिया भर में प्रसिद्ध है. मुंबई में गणपति मूर्तियां अपने आप में अद्वितीय होती हैं. मुंबई का गौड़ सारस्वत ब्राहमण मंडल (जीएसबी सेवा मंडल) सबसे भव्य और महंगे गणपति पंडाल की स्थापना करता है. इस बार भी जीएसबी मंडल सबसे अमीर गणपति की स्थापना करेगा. जीएसबी मंडल ने अपने पंडाल के लिए इस साल रिकॉर्ड ₹474.4 करोड़ का बीमा कवर लिया है. पिछली बार 400.8 करोड़ रुपये का बीमा कराया गया था.
इस साल बीमा राशि बढ़ने की मुख्य वजह गणपति प्रतिमा पर चढ़े सोने-चांदी के आभूषणों का बढ़ता मूल्य और सेवकों की संख्या में बढ़ोतरी है. न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने मंडल को यह बीमा कवर प्रदान किया है. इस पॉलिसी में ऑल रिस्क कवर, स्टैंडर्ड फायर और स्पेशल पेरिल पॉलिसी (भूकंप जोखिम के साथ), पब्लिक लायबिलिटी और सेवकों के लिए पर्सनल एक्सीडेंट कवर शामिल है.
₹474.4 करोड़ के बीमा में सबसे बड़ा हिस्सा ₹375 करोड़ का है, जो सेवकों जैसे अचाक, रसोइए, गद्दीदार, चप्पल स्टॉल कर्मचारी, वॉलेट पार्किंग स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों के व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा के लिए है. इसके बाद ₹67 करोड़ सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य जोखिमों को कवर करता है. इसके अलावा, मंडल ने ₹30 करोड़ का पब्लिक लायबिलिटी कवर और ₹2 करोड़ की स्टैंडर्ड फायर और स्पेशल पेरिल पॉलिसी भी ली है.
साल 2023 में 66 किलो सोने और 295 किलो चांदी से बप्पा की मूर्ति को सजाया गया था. पिछले साल यानी 2024 में बप्पा की मूर्ति को 69 किलो सोने के आभूषणों और करीब 336 किलो चांदी के गहनों से सजाया गया था. जीएसबी मंडल ने अभी यह खुलासा नहीं किया है कि इस बार बप्पा की मूर्ति को सोने और चांदी के कितने आभूषणों से सजाया जाएगा. साथ ही 474 करोड़ के बीमा कवर के लिए कितना प्रीमियम चुकाया है, इसकी जानकारी भी नहीं दी है.
जीएसबी गणेश मंडल मुंबई के किंग्स सर्कल क्षेत्र में स्थित होता है और आम लोग और मशहूर हस्तियां यहां आती हैं. जीएसबी सेवा मंडल के लिए सार्वजनिक गणेश उत्सव का यह 71वां वर्ष है. साल 2024 में लगाया गया पूरा पंडाल फायर प्रुफ था और इसका पांच दिन का किराया 1.5 करोड रुपये चुका गया था. पंडाल में गणपति के दर्शनों के लिए क्यूआर कोड से एंट्री हुई थी. सेवा मंडल ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर पंडाल में सभी जगहों पर चेहरे की पहचान करने वाले कैमरे लगाए थे.