सुल्तानपुर में एनस्थीसिया ओवरडोज से मरीज की मौत
सुल्तानपुर के प्राइवेट हॉस्पिटल में पथरी के ऑपरेशन के बाद व्यक्ति की मौत हो गई। खबर लगते ही परिजनों ने हंगामा कर दिया। आरोप लगाया कि एनस्थीसिया ओवरडोज की वजह से मरीज की जान चली गई। पहले वो बिल्कुल ठीक थे। जब से इंजेक्शन लगा, उनकी तबीयत बिगड़ गई।
परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराया। पुलिस सूत्रों की मुताबिक, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में एनेस्थीसिया ओवरडोज की बात सामने आई है। हालांकि, विस्तृत रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
इस बीच स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। अस्पताल प्रबंधन से जवाब तलब किया है। हॉस्पिटल के आला अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान मरीज की हालत अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया था।
मामले में पुलिस ने कहा कि शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। आगे की कार्रवाई के लिए काम किया जा रहा है। इस बीच, सीएमओ का कहना है कि जांच टीम गठित की गई है। जल्द ही एक्शन लिया जाएगा। मामला बुधवार को सुलतानपुर कोतवाली नगर का है।
सुलतानपुर कोतवाली नगर में शुभांगी हॉस्पिटल है। 18 किलोमीटर दूर आशापुर के रहने वाले राजेश मिश्रा (48) इलाज के लिए यहां आए थे। उन्हें पेट दर्द की शिकायत थी। कुछ टेस्ट कराने के बाद शुभांगी हॉस्पिटल के डॉक्टर राजेश गौतम ने पथरी होने की बात कही। सर्जरी की सलाह दी।
राजेश को 2 मार्च को अस्पताल में भर्ती किया गया। 3 मार्च की शाम उनका ऑपरेशन किया गया। मृतक के भांजे अमर कृष्ण तिवारी ने बताया- सर्जरी आयुष्मान योजना के तहत कराई जा रही थी। ऑपरेशन शुरू होने से पहले राजेश पूरी तरह सामान्य थे। ऑपरेशन थिएटर में बेहोशी का इंजेक्शन दिए जाने के कुछ समय बाद उनकी हालत अचानक बिगड़ने लगी।
आरोप है कि एनस्थीसिया डॉक्टर को न बुलाकर दो हजार बचाने के चक्कर में हॉस्पिटल वालों ने खुद डोज दे दिया। डॉक्टरों ने उन्हें मरीज की स्थिति के बारे में समय पर जानकारी नहीं दी। जब हालत ज्यादा गंभीर हुई और राजेश को झटके आने लगे, तब अस्पताल की ओर से एम्बुलेंस बुलाकर उन्हें सुल्तानपुर के ही आस्था हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। हालांकि, वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि मरीज की मौत शुभांगी अस्पताल में ही हो चुकी थी। आस्था अस्पताल में उनसे 25 से 30 हजार रुपये लिए गए। कुछ देर बाद मरीज को मृत घोषित कर दिया गया।
परिजनों ने बताया कि जब वे रात 11 बजे शुभांगी अस्पताल वापस पहुंचे, तो डॉक्टर ने दरवाजा नहीं खोला। डायल 112 ने भी प्रयास किया, लेकिन दरवाजा नहीं खुला।
मृतक के पिता राम करण मिश्रा ने बताया- भैया मोटर साइकिल से पत्नी को बैठाकर लाया था। ऑपरेशन के नाम पर न जाने कौन सी सुई लगा दी कि वो तड़पने लगा और उसकी मौत हो गई।
उनका आरोप है कि जैसे ही बेटे की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हुई, डॉक्टर ने अस्पताल का गेट अंदर से बंद कर लिया। उनकी मांग है कि आरोपी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनके परिवार को न्याय मिले।
उनके परिवार में पत्नी संगीता मिश्रा, 20 साल का बेटा हर्षित मिश्रा और 5 साल की बेटी रानी मिश्रा हैं। राजेश मिश्रा अपने चार भाइयों में सबसे बड़े थे और उनका अपना व्यवसाय था।
पुलिस ने जांच शुरू की
मामले को तूल पकड़ता देखकर स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी। नगर कोतवाल संदीप राय ने बताया कि शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिजनों की शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच की जा रही है।
डॉक्टर बोले- कोई लापरवाही नहीं बरती
दूसरी ओर डॉक्टर राजेश कुमार गौतम का कहना है कि ऑपरेशन के लिए बाहर से विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाए गए थे। मरीज को अचानक घबराहट व झटके आने लगे थे। उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
CMO ने टीम बनाई, जांच के लिए हॉस्पिटल जाएगी
वहीं, सीएमओ भरत भूषण ने बताया- शव का पोस्टमॉर्टम पैनल और वीडियोग्राफी के साथ कराया गया है। परिवार की शिकायत पर टीम गठित की गई है। टीम जांच के लिए हॉस्पिटल जाएगी। पूर्व एडी स्वास्थ्य डॉ. राजेंद्र कपूर ने बताया- ओवरडोज से कार्डियक अरेस्ट से मौत होने का चांस ज्यादा रहता है। हॉर्ट, लेंस और ब्लड लैब टेस्ट के लिए भेजे हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तीन डोज दी गई है। विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है।

