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शाहजहांपुर में शहीदों का अपमान बर्दाश्त नहीं… बिस्मिल-अशफाक की प्रतिमाओं पर बुलडोजर एक्शन से भड़के लोग

शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने शहीदों की नगरी के सम्मान को ठेस पहुंचाई है. जहां एक ओर सरकार अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने के लिए जानी जाती है, वहीं यहां नगर निगम ने सौंदर्यकरण के नाम पर देश के महान क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और ठाकुर रोशन सिंह की प्रतिमाओं को ही बुलडोजर से जमींदोज कर दिया. देर रात हुई इस कार्रवाई में मूर्तियों के टुकड़े-टुकड़े कर उन्हें कूड़े के डंपिंग ग्राउंड में फेंक दिया गया, जिससे पूरे शहर में आक्रोश का माहौल है.

प्रतिमाओं को क्यों हटाया जाना था?
नगर निगम प्रशासन का तर्क है कि इस स्थान पर नगर निगम परिसर का सौंदर्यकरण और मार्ग चौड़ीकरण का कार्य प्रस्तावित था. अधिकारियों का कहना है कि इन महान बलिदानियों की प्रतिमाओं को पुराने स्थान से हटाकर एक अधिक भव्य और सुरक्षित स्थान पर ससम्मान स्थापित किया जाना था. योजना यह थी कि शहीदों के गौरव के अनुरूप यहां एक नया स्मारक बनाया जाए ताकि आम जनता को आवागमन में असुविधा न हो और शहीदों को बेहतर दृश्यता मिल सके. हालांकि, ठेकेदार और कर्मचारियों की घोर लापरवाही ने इस पूरी प्रक्रिया को अपमानजनक बना दिया, जहां विधि-विधान के बजाय बुलडोजर का क्रूर इस्तेमाल किया गया.

राजेश अवस्थी का कहना है कि शहीदों की प्रतिमाओं के साथ किया गया अन्याय राष्ट्रद्रोह है. सौंदर्यीकरण के नाम पर मूर्तियों को डंपिंग ग्राउंड में फेंकना निंदनीय है. जिन वीरों ने देश के लिए सर्वस्व न्योछावर किया, उनके सम्मान से खिलवाड़ करने वाले नगर आयुक्त और ठेकेदारों पर रासुका (NSA) के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. हमने 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है और पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया है. अगर दोषी अधिकारियों पर सख्त एक्शन नहीं लिया गया, तो हम कार्यालयों में तालाबंदी कर बड़ा आंदोलन करेंगे

स्थानीय निवासी रामदेव त्रिपाठी ने शहीदों की प्रतिमाओं को हटाने के तरीके पर गहरा रोष व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि सौंदर्यीकरण के नाम पर प्रतिमाओं को इस तरह हटाना शहीदों का अपमान है. उन्होंने कहा कि अगर प्रतिमाएं बदलनी ही थीं, तो उन्हें ससम्मान विसर्जित किया जाना चाहिए था. उन्होंने सरकार से इस लापरवाही का संज्ञान लेने और दोषियों को सज़ा देने की मांग की है.
ज्ञानेश तिवारी ने प्रतिमाओं को बेतरतीब ढंग से हटाना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के शहीदों के प्रति सम्मान के साथ खिलवाड़ बताया है. हम उन्होंने कहा कि इस विषय को केवल मजदूरों पर डालकर पल्ला नहीं झाड़ सकते. यह एक गंभीर मुद्दा है और इसकी जिम्मेदारी किसी न किसी बड़े पदाधिकारी को लेनी होगी. प्रशासन को चाहिए था कि वे पुरानी मूर्तियों को ससम्मान विसर्जित कर नई मूर्तियों की स्थापना करते. इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी है, उस पर सख्त कार्रवाई हो.

छात्र प्रथम त्रिपाठी ने कहा कि बचपन से हमने किताबों में पढ़ा है कि हमारे शहीदों ने देश की आज़ादी के लिए कितना बड़ा योगदान दिया है. लेकिन आज, शहीदों की नगरी शाहजहांपुर में शहीद दिवस के मौके पर उनकी प्रतिमाओं को जिस तरह से ध्वस्त किया गया, वह बेहद निराशाजनक है. सरकार नई प्रतिमाएं लगवाना चाहती है, यह अच्छी बात है, पर सरकारी कर्मचारियों का प्रतिमाओं को हटाने का यह अपमानजनक तरीका बिलकुल गलत है. उन्होंने कहां कि मैं सरकार से इस मामले में उचित कार्रवाई और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग करता हूं

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