हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष विशेष महत्व : इन 3 रूप में घर आते हैं पूर्वज
पितृ पक्ष 2025. हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष विशेष महत्व रखता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से प्रारंभ होता है. आश्विन मास की अमावस्या तिथि पर खत्म हो जाता है. पितृ पक्ष में पितरों को याद कर सम्मान प्रदान किया जाता है. पितृपक्ष में लोग 15 दिनों के दौरान, पितरों को याद कर उनके निमित्त तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं. पितृ पक्ष के दौरान कई बार हमारे पितृ हमको आशीर्वाद देने कई रूपों मे घर पर आते हैं और बहुत बार जाने अनजाने मे हम उनका अनादर कर देते हैं
क्या होता है पितृदोष
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब हमारे पूर्वजों की आत्माएं तृप्त नहीं होती, तो ये आत्माएं पृथ्वी लोक में रहने वाले अपने वंश के लोगों को कष्ट देती हैं. इसी को ज्योतिष शास्त्र में पितृदोष कहा गया है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार मृत्यु लोक पर हमारे पूर्वजों की आत्माएं अपने परिवार के सदस्यों को देखती रहती हैं. जो लोग अपने पूर्वजों का अनादर करते हैं. इसलिए पितृ पक्ष के दौरान बहुत से रूप मे पितृ घर पर आते है. इसलिए भूल से भी उनका अपमान नही करना चाहिए.
इन लोगों के रूप मे दर्शन दें सकते है पितृ
– सनातन धर्म में दान-पुण्य का बड़ा ही अधिक महत्व है. बहुत बार देखा जाता है. पितृ पक्ष के दौरान कई बार पितर साधु, संत, या भिक्षुक के रूप में प्रकट होते हैं. इस दौरान साधुओं, संतों या गरीबों को भोजन और दान देना पितरों को प्रसन्न करने का एक तरीका माना जाता है. भूल से भी इनका अनादर नहीं करना चाहिए.
– हिन्दू धर्म गाय को गौ माता का दर्जा दिया गया है. श्राद्ध पक्ष में गाय या कुत्ते का भी द्वार पर आना बहुत शुभ माना जाता है. अगर ये रास्ते में भी दिख जाए, तो इन्हें भगाना या दुत्कारना नहीं चाहिए. बल्कि, इनको कुछ न कुछ खाने को जरूर देना चाहिए. इससे पितृ प्रसन्न होते हैं.
– मेहमान को अतिथि भव कहा जाता है, लेकिन बहुत बार देखा जाता है कि कोई अतिथि या मेहमान हमारे घर आ जाता है, तो हम परेशान हो जाते हैं और यह सोचने लग जाते हैं कि यह कब जाएंगे. पितृ पक्ष के दौरान पितर कभी-कभी घर के मेहमान के रूप में भी आ सकते हैं. इनका सम्मान करना चाहिए और उन्हें तिरस्कार नहीं करना चाहिए.