लखनऊ में राहुल गांधी बोले- मोदी अब भारत के प्रधानमंत्री नहीं, वे अमेरिका का काम कर रहे
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, राहुल गांधी जिंदाबाद करने से कोई फायदा नहीं है। इससे कुछ होता नहीं है। होता कैसे है, जो मन बना लेता है कि ये जो हो रहा है, उसे मैं एक्सेप्ट नहीं करने वाला हूं।
भाषण देने से पहले मैं सोच रहा था कि आंबेडकर शिक्षा की बात करते थे। संगठित होने की बात करते थे। आज हम काशीराम को याद करते हैं। लेकिन आज समाज को 15 और 85 बांट दिया गया है। फायदा सिर्फ 15% वालों को मिल रहा है। 50% को अलग-अलग कर दिया गया।
राहुल गांधी ने कहा, जवाहरलाल नेहरू जिंदा होते तो कांशीराम उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर होते।
उन्होंने कहा, केंद्रीय मंत्री हरदीपपुरी का नाम एपस्टीन फाइल में है। उनकी बेटी की कंपनी में जॉर्ज सोरोस की फंडिंग है। नरेंद्र मोदी अब भारत के प्रधानमंत्री नहीं रहे, वे अमेरिका का काम कर रहे हैं। जब मैं यह बात संसद में बोलने जा रहा था तो नरेंद्र मोदीजी भाग कर निकल गए।
इससे पहले एयरपोर्ट पर कांग्रेस के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। पहली बार है जब राहुल गांधी कांशीराम जयंती से 2 दिन पहले कोई बड़ा इवेंट लखनऊ में करने आए हैं। कार्यक्रम में करीब 4 हजार लोग शामिल हैं। दलित वोटर्स की सियासत में कांग्रेस का यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का सपा के साथ गठबंधन था, तब यूपी में NDA की सीटों की संख्या 36 पर सिमट गई थी। महागठबंधन 43 सीटों पर जीतने में कामयाब रहा। महागठबंधन इसी सफलता को 2027 के विधानसभा चुनाव में भी दोहराना चाहता है।
सपा भी कांशीराम जयंती को PDA दिवस के रूप में मनाने का ऐलान कर चुकी है। यूपी के 75 जिलों में पार्टी के जिला मुख्यालयों पर 15 मार्च को कार्यक्रम होंगे। कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां हैं। दलित राजनीति में बसपा का प्रभाव अब भी बरकरार है, खासकर जाटव समुदाय में उसका भावनात्मक जुड़ाव मजबूत है। दूसरी ओर, भाजपा ने भी पिछले 10 बरसों में दलित वर्गों के बीच संगठन मजबूत किया है और सरकारी योजनाओं के जरिये समर्थन बढ़ाया है, इसलिए कांग्रेस के लिए इस वोट बैंक में बड़ी जगह बनाना आसान नहीं है।

