अलीगढ़ के रिटायर्ड DGM से 1.10 करोड़ की ठगी
अलीगढ़ में रिटायर्ड बैंक अधिकारी से 1.10 करोड़ की ठगी करने वाले 12 साइबर ठग पकड़े गए हैं। ये ठग शेयर मार्केट में निवेश करने पर 200 प्रतिशत का लाभ होने का झांसा देते थे। इसके बाद वाट्स एप ग्रुप पर जोड़कर सारी जानकारी हासिल करते थे।
ऐसे में पुलिस ने करोड़ों ठगने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा करते हुए 7 राज्यों में एक साथ दबिश देकर 12 ठगों को गिरफ्तार किया है। समय रहते 600 फर्जी वाट्सएप निवेश ग्रुप बंद कराकर करीब 1.5 लाख लोगों के साथ होने वाली 500 करोड़ की ठगी को रोक दिया। दिनेश कुमार शर्मा स्वर्ण जयंती नगर में रहते हैं। वह पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से डिप्टी जनरल मैनेजर (DGM) पद से रिटायर्ड हैं। उन्होंने बताया- साइबर ठग 2 नवंबर से मुझे झांसे में लिए हुए थे।
पहले दिया 40 प्रतिशत मुनाफे का लालच
रिटायर्ड डीजीएम ने बताया- ठगों ने शुरुआत में वाट्स एप पर एक लिंक भेजा। फिर इस लिंक के जरिए शेयर मार्केट में पैसे लगाने को कहा। साथ ही लगातार जुड़े पर 35 से 40 प्रतिशत का मुनाफा देने का बात कही। पहले तो यह बात मेरे समझ में नहीं आई। इसके बाद 16 दिसंबर 2025 को थोड़ा सा इंवेस्ट करने की बात कहने पर शुरूआत में मैंने पांच हजार रुपए लगा दिए। फिर हमें ‘VIP प्रॉफिट क्लब’ जैसे आकर्षक नाम वाले दो व्हाट्सएप ग्रुप्स में जोड़ा गया।
200 प्रतिशत मुनाफे का दिया लालच
रिटायर्ड डीजीएम ने बताया- ये ठग ग्रुप में खुद को एक्सपर्ट बताते थे। रोजाना शेयर मार्केट में भारी मुनाफे के स्क्रीनशॉट और वीडियो शेयर करते थे। इसे देखकर मैं भी लालच में आ गया। अब कोई चीज रोज-रोज देखो, तो उसका कुछ फर्क तो पड़ता ही है। मैं वहीं मार खा गया।
इसी का फायदा उठाकर 200 प्रतिशत तक रिटर्न का लालच देकर अलग-अलग किश्तों में उनसे कुल 1,10,70,000 रुपए निवेश करा लिए। इस दौरान मुनाफे की कोई भी रकम उनके पास नहीं आई।
मुनाफे की राशि ट्रांसफर करने पर घुमाया
जब मैंने उनसे पूछा, तो नया टास्क बताकर मुनाफे की राशि दिखा देते थे। बाद में ठगों ने मुझसे तीन करोड़ रुपए निवेश करने का टास्क दिया। तब मेरा दिमाग खराब हुआ। तभी मैंने अपने घरवालों को पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया। ठगी का एहसास होने पर मुनाफा निकलवाने की बात पर बहाना करने लगे थे। इसके बाद 31 जनवरी 2026 को रात में ही साइबर थाने में मैंने शिकायत दर्ज कराई।
7 टीमें की गईं गठित
इस मामले में एसएसपी नीरज कुमार जादौन ने एसपी देहात अमृत जैन की निगरानी में 7 विशेष पुलिस टीमें गठित की गईं। जांच में सामने आया कि यह गैंग हांगकांग से संचालित हो रही थी और उसमें भारत के अलग–अलग राज्यों के साइबर अपराधी जुड़े हुए थे। टेक्निकल सर्विलांस, बैंक ट्रांजैक्शन और IP एनालिसिस के आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान में एक साथ छापेमारी की।

