रोहित-विराट कोहली बने सेंटा क्लॉज, झोले में लेकर आए ढेर सारे गिफ्ट!
नई दिल्ली. साल 2025 का ये सप्ताह उत्सवों का है और इसमें कोई शक नहीं कि खेल, सबसे बढ़कर, खुशियाँ लाता है और पिछले कुछ महीनों में जिन दो खिलाड़ियों ने प्रशंसकों को सबसे ज़्यादा खुशी दी है, वे हैं विराट कोहली और रोहित शर्मा. दोनों साल के अंत में सेंटा क्लॉज बनकर फैंस के लिए आए जिनके झोले में सिर्फ खुशियां हीं खुशियां थी.
फैंस के लिए सेंटा क्लॉज बन चुके विराट रोहित ने पहला संकेत तब दिया जब उन्होंने ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए चयन के लिए खुद को उपलब्ध कराया. सब कुछ हासिल कर लेने के बाद, अगर कोई दीर्घकालिक योजना न होती तो वे एक अपेक्षाकृत महत्वहीन द्विपक्षीय वनडे सीरीज़ खेलने की ज़रूरत ही नहीं समझते लेकिन भूख अब भी ज़िंदा है और यही भूख पिछले कुछ महीनों में इन दोनों दिग्गजों को परिभाषित करती रही है सफल होने की भूख और दृढ़ संकल्प.
इस उत्सव के मौसम में यही सबसे बड़ा संदेश है जो कुछ भी हासिल किया जा सकता था, सब हासिल करने के बाद भी उनके भीतर की भूख पहले से कहीं ज़्यादा है. वे अपनी प्रतिष्ठा दाँव पर लगाने और खुद को चुनौती देने के लिए तैयार थे. मैदान में उतरने, शरीर पर चोटें सहने और यह साबित करने के लिए कि उनके खेल में अब भी दम है. अब जब वे घरेलू क्रिकेट खेल चुके हैं, तो यह सुरक्षित रूप से कहा जा सकता है कि दोनों की नज़रें 2027 विश्व कप पर हैं और वही लक्ष्य है. हाँ, टूर्नामेंट अभी 20 महीने दूर है और समय काफ़ी है, लेकिन सच्चाई यह भी है कि 2026 आते-आते चीज़ें बिल्कुल नज़दीक आ जाएँगी. इसलिए रोहित और विराट को बस आने वाले एक साल तक खुद को लगातार आगे धकेलते रहना है. अगर वे ऐसा करते हैं, तो विश्व कप उनकी पहुँच में होगा. ऑस्ट्रेलिया में और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज़ में जो हमने देखा है, उससे साफ है कि वे आख़िरी बड़े प्रयास के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
यही हर भारतीय क्रिकेट प्रशंसक के लिए क्रिसमस का तोहफ़ा है—इन दो दिग्गजों की भूख और प्रतिबद्धता. वे यह भारत के लिए और अपने लिए करना चाहते हैं और ऐसा करते हुए खेल और प्रशंसकों को कुछ लौटाना चाहते हैं. दोनों के छोटे परिवार हैं और वे चाहें तो क्रिसमस और नए साल के बाद जनवरी के पहले हफ्ते में घरेलू क्रिकेट खेलने का विकल्प चुन सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. मैदान में बिताया गया हर एक मिनट उन्हें बेहतर बनाएगा, और वे यह बात जानते हैं. क्रिकेट अब भी दोनों के जीवन का सबसे बड़ा प्रेरक तत्व है और यह उनके प्रयासों से साफ झलकता है. वजन कम करने से लेकर कड़ी मेहनत तक, उन्होंने अपनी मंशा पहले ही स्पष्ट कर दी है. भारतीय क्रिकेट के लिए, यह दौर निश्चित रूप से 2025 के आसपास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाएगा.
दोनों के घरेलू क्रिकेट खेलने से देखिए कैसी हलचल है लोग इसे फॉलो कर रहे हैं और उनकी अपनी टीमों से लेकर विपक्षी टीमों तक, हर खिलाड़ी को उन्हें करीब से देखने का फ़ायदा मिलेगा. हिमांशु सांगवान इस साल रणजी ट्रॉफी में विराट को आउट करने के बाद एक घरेलू नाम बन गए थे और अब विजय हज़ारे ट्रॉफी में इन दोनों दिग्गजों के खेलने से घरेलू क्रिकेट एक बार फिर फैशनेबल हो गया है. ये भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद सकारात्मक संकेत हैं ऐसी चीज़ें जो प्रशंसकों के चेहरों पर मुस्कान लाती हैं. एक कठिन दुनिया में, इन मुस्कानों की सख़्त ज़रूरत है.

