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10-10 पैसे करके गिरा रुपया, लेकिन एक ही दिन में 1.15 रुपए का उछाल!

पिछले कुछ दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा था. रोजाना 10-10 पैसे की गिरावट के साथ यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था. ईरान युद्ध की वजह से ऊर्जा कीमतें बढ़ने, विदेशी निवेशकों के पैसे निकालने और डॉलर की मजबूती से रुपया 4 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका था. लेकिन आज सोमवार को बाजार खुलते ही रुपया एक दिन में करीब 1.15 रुपये तक मजबूत हो गया. इसका मुख्य कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का नया सख्त निर्देश है, जिसमें बैंकों को डॉलर-रुपया पोजिशन तेजी से घटाने को कहा गया है.

NOP-INR का पूरा मतलब है Net Open Position – Indian Rupee है. यह बैंकों की ओपन डॉलर-रुपया पोजिशन होती है, यानी बैंकों के पास कितना डॉलर लंबे (long dollar) या शार्ट (short rupee) पोजिशन पर है. आमतौर पर बैंकों को अपनी टियर-1 कैपिटल के 25 प्रतिशत तक NOP की छूट होती थी, जिससे कई बैंक 1 बिलियन डॉलर या उससे ज्यादा की बड़ी पोजिशन रख लेते थे. इससे रुपया पर दबाव बढ़ता था क्योंकि बैंक डॉलर की मजबूती की उम्मीद में रुपया बेचते थे. अब RBI ने घरेलू (onshore) बाजार में NOP-INR को प्रति दिन 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया है. RBI ने यह निर्देश पिछले शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद जारी किया. ऐसे में बैंकों को 10 अप्रैल 2026 तक अपनी ओपन पोजिशन घटाकर 100 मिलियन डॉलर पर लाना होगा. सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, बैंकर्स के मुताबिक, कुल 30 से 40 बिलियन डॉलर की पोजिशन अनवाइंड (घटानी) पड़ सकती है. बैंकों को डॉलर बेचकर रुपया खरीदना होगा, जिससे रुपये में तेज उछाल आएगा.

RBI ने क्यों उठाया यह कदम?

हाल के दिनों में रुपये की एकतरफा गिरावट से RBI की चिंता बढ़ गई थी. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद रुपये ने 94.82 तक का रिकॉर्ड निचला स्तर छुआ. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयरों से 11 बिलियन डॉलर और बॉन्ड से 1.6 बिलियन डॉलर निकाल लिए. RBI पहले विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचकर रुपया संभाल रहा था, लेकिन इससे रिजर्व में 30 बिलियन डॉलर से ज्यादा की कमी आई. अब RBI ने प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के बजाय बैंकों की पोजिशन पर लगाम लगाने का फैसला लिया है. इससे शॉर्ट सेलर्स (जो रुपये के गिरने पर दांव लगाते हैं) पर दबाव बढ़ेगा और रुपये में अस्थिरता कम होगी. वैश्विक स्तर पर डॉलर फिलहाल ऊर्जा कीमतों (खासकर तेल) के सपोर्ट से मजबूत है. लेकिन आगे चलकर मिडिल ईस्ट में स्थिति स्थिर होने, अमेरिकी नीतियों और फेड की सॉफ्ट अप्रोच से डॉलर कमजोर हो सकता है. भारत में RBI का यह कदम रुपये को तत्काल राहत देगा, लेकिन लंबे समय में तेल की कीमतें, कैपिटल फ्लो और आर्थिक बुनियादी बातें ही रुपये की दिशा तय करेंगी. यह RBI का दशक में सबसे सख्त कदमों में से एक माना जा रहा है. इससे रुपये में स्थिरता आएगी और सट्टेबाजी पर भी अंकुश लगेगा.

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