संभल : शिव मंदिर से साईं प्रतिमा को हटाया, गंगा में विसर्जित किया
संभल के ठेर एरिया में बने प्राचीन शिव मंदिर से साईं बाबा की प्रतिमा मंगलवार सुबह 4 बजे हटा दी गई। मंदिर कमेटी के सदस्यों ने प्रतिमा को लोडर में लदवाया। इसके बाद शहर से 60 किमी दूर अनूपशहर के पास गंगा नदी में विसर्जित कर दिया।
मंदिर के पुजारी आचार्य पंडित अवनीश शास्त्री ने श्रद्धालुओं की सहमति से 22 अगस्त को मंदिर से प्रतिमा हटवाने का निर्णय लिया था। उनका कहना था कि शिव मंदिर में साईं बाबा की प्रतिमा का कोई औचित्य नहीं है। पिछले साल वाराणसी के कई मंदिरों से भी साईं बाबा की प्रतिमाएं हटाई गई थीं।
साईं बाबा की यह प्रतिमा संभल के शिव मंदिर में 14 साल पहले 15 जुलाई, 2011 को स्थापित की गई थी। अब इस जगह पर कल यानी बुधवार को गणेश चतुर्थी पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
अब पूरा मामला समझिए संभल के ठेर मोहल्ले में साल 1992 में शिव मंदिर का निर्माण हुआ था। कोट पूर्वी निवासी अशोकराज भंडूला ने अपनी पत्नी राजरानी की स्मृति में 15 जुलाई, 2011 को मंदिर में साईं बाबा की प्रतिमा स्थापित करवाई थी। इसे लगवाने में उन्होंने अपनी पुत्री और दामाद की मदद भी ली थी।
मंदिर में रोज पूजा करने आने वाले 50-60 परिवारों ने यहां से साईं प्रतिमा हटाने की मांग की थी। श्रद्धालुओं ने कहा था कि हम मंदिर तो आते हैं, लेकिन साईं बाबा की पूजा नहीं करते। इसके बाद मंदिर कमेटी ने इस पर विचार किया। सबकी सहमति बनने पर साईं बाबा की प्रतिमा हटाने का निर्णय लिया गया।
पुजारी बोले- सांई का हिंदू धर्म से लेना-देना नहीं
मंदिर के पुजारी पंडित अवनीश शास्त्री ने बताया – साईं बाबा की प्रतिमा को आज हटा दिया गया है। इनका हमारे धर्म से कोई लेना देना नहीं है। हमारे शास्त्र, वेद या ग्रंथो में साईं का कोई जिक्र नहीं है। न ही इनका कोई मंत्र या कोई श्लोक है। कलयुग में हमारे एक फकीर हुआ करते थे, जिनसे लोगों की भावना जुड़ गई। इसके बाद लोग इनकी पूजा करने लगे।
मंदिरों में किसी फकीर या किसी आदमी की पूजा नहीं होनी चाहिए। हमारे भगवान के जो गुरु हुए, बड़े-बड़े संत शंकराचार्य, तुलसीदास उनकी प्रतिमा तक मंदिरों में नहीं है तो साईं बाबा का मंदिरों से क्या लेना देना? इसलिए आज गंगा जी में इनका विसर्जन कर दिया गया है।
लोग बोले- मंदिर में सांई की प्रतिमा का क्या काम दर्शन करने पहुंचे नीरज कुमार गुप्ता ने कहा- प्राचीन शिव मंदिर मोहल्ला ठेर से सांई मंदिर की प्रतिमा को हटाया गया है। सांई बाबा का हमारे धर्म में कोई स्थान नहीं। यह वैसे भी चांद मियां हैं। इसी वजह से इनको हटाया है।
एक या दो परिवार छोड़कर कोई इनकी मंदिर में पूजा नहीं करता है। अब तो यहां वैसे भी गणेश जी आ रहे हैं। गणेश जी के लिए जगह होनी भी जरूरी है। सांई बाबा की प्रतिमा को हटाना बहुत जरूरी हो गया था।