संभल हिंसा के आरोपी का जेल से छूटने पर स्वागत
संभल हिंसा का आरोपी और जामा मस्जिद का सदर जफर अली 131 दिन बाद मुरादाबाद जेल से जमानत पर रिहा हो गया है। शुक्रवार को जेल से छूटने पर उसका जोरदार स्वागत हुआ। जैसे ही वह गेट के बाहर आया, समर्थकों ने जिंदाबाद के नारे लगाए।
मालाएं पहनाई गई, फिर उसे कंधे पर उठाकर कार तक ले गए। इसके बाद जफर खुली जीप में सवार हुआ। वहां से 10 गाड़ियों के काफिले के साथ मुरादाबाद से संभल तक 42 किमी लंबा रोड शो जैसा निकाला।
जगह-जगह उसका स्वागत हुआ। पटाखे फोड़े गए। जफर ने भी खुली जीप से हाथ लहराकर नेताओं की तरह अभिवादन स्वीकार किया। उसके संभल पहुंचने की सूचना पर 3 हजार से अधिक लोग जुट गए।
यहां जैसे ही वह जीप से उतरा, लोगों ने फिर से उसे कंधे पर उठा लिया। इस दौरान सदर ने कहा- अगर किसी चीज को बचाना है तो आपके हाथ में पावर का होना बहुत जरूरी है। अगर मेरे हाथ में पावर होती तो आज जेल न जाता।
जफर अली को इसी साल 23 मार्च को संभल हिंसा मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस पर भीड़ को भड़काने का आरोप है। गुरुवार को चंदौसी MP/MLA कोर्ट से उसे जमानत मिल गई थी।
23 मार्च की सुबह 11 बजे पुलिस ने भीड़ को भड़काकर दंगा कराने के आरोप में जफर अली को उसके घर से उठाया था। करीब 4 घंटे तक कोतवाली में पूछताछ की। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। जफर अली को रैपिड रिएक्शन फोर्स (RRF) के करीब 50 जवानों और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में पुलिस जीप में बैठाया गया था।
गिरफ्तारी के समय जफर अली वकील की पोशाक में था। उसने काला कोट हाथ में ले रखा था। पुलिस जीप में बैठते हुए जफर अली ने हाथ हिलाकर लोगों से समर्थन मांगा। इसके बाद वह जीप में बैठ गया था।
उस वक्त जफर अली ने चिल्लाकर कहा था- मुझे फंसाया गया, क्योंकि मैंने पुलिस वालों की पोल खोल दी थी। मैंने बता दिया था कि बच्चों को इन्होंने मारा है। हिंसा में जितने भी लोग मारे गए, उन्हें पुलिस और प्रशासन ने मारा है।