प्रयागराज में ननद-भाभी एक साथ PCS अफसर बनीं
प्रयागराज की आकृति शुक्ला ने 2 बार यूपीपीसीएस की परीक्षा दी। दोनों बार प्रीलिम्स से ही बाहर हो गईं। इस दौरान उनके भाई अमित की शादी हुई। भाभी श्रेया शर्मा घर आ गईं।
वह भी यूपीपीसीएस की तैयारी कर रही थीं। अब दोनों एक-दूसरे का सहारा बनीं। आकृति के जो सब्जेक्ट कमजोर थे, उनमें श्रेया ने मदद की और जो सब्जेक्ट श्रेया के कमजोर थे, उसमें आकृति मदद करने लगी।
सास-ससुर ने भी बहू को बेटी की तरह समझा। आकृति और श्रेया को घर के कामों से फ्री रखा। नतीजा ये हुआ कि यूपीपीसीएस-2024 के रिजल्ट में आकृति शुक्ला डिप्टी एसपी बन गईं हैं, उनकी भाभी श्रेया कमर्शियल टैक्स ऑफिसर।
अब परिवार में जश्न का माहौल है, लेकिन लोगों में मन में एक सवाल ये जरूर है कि आकृति और श्रेया किस तरह एक-दूसरे का सहारा बनकर सफलता की सीढ़ियां चढ़ती चली गईं।
जौनपुर में पुश्तैनी घर, परिवार अब प्रयागराज में रह रहा प्रयागराज में मम्फोर्डगंज मोहल्ला है। यहीं अखिलेश शुक्ला अपने परिवार के साथ रहते हैं। अखिलेश का पुश्तैनी घर जौनपुर के सुजानगंज इलाके के बर्जी कला गांव में है। वह प्रयागराज में ही कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट्स में सीनियर ऑडिटर के पद पर रहे थे। यहीं अपना घर बनाया और परिवार के साथ रहने लगे।
घर में उनकी पत्नी के अलावा बेटे अमित और बेटी आकृति शुक्ला हैं। अखिलेश के दो बड़े भाई भी सरकारी नौकरी में रहे, वह भी मम्फोर्डगंज में ही रहते हैं।
भाई सरकारी जॉब में, पहले से पढ़ाई का माहौल था… हमने अखिलेश से पूछा- घर में पढ़ाई का इतना अच्छा माहौल कैसे बना? वह कहते हैं- हमारे घर में भाई सरकारी नौकरी में रहे हैं, इसलिए पढ़ाई का माहौल पहले से बना हुआ था। अमित और आकृति ने जो भी पढ़ाई करनी चाही, हमने उन्हें कभी नहीं रोका। बस यही देखा कि क्या ये पढ़ाई उचित है या फिर नहीं।
आकृति ने सेंट मैरी कॉन्वेंट से शुरुआती पढ़ाई की। फिर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीएससी किया। इसके बाद वह तैयारी में जुट गई। स्टेट यूनिवर्सिटी से लॉ की भी पढ़ाई करने लगी।
अखिलेश शुक्ला की बहू श्रेया इस वक्त कर्नाटक के बेंगलुरू में PAG कार्यालय में ऑडिटर के पद पर तैनात हैं। वहीं पर अपने पति अमित के साथ रहती हैं। अमित AI इंजीनियर हैं। हमने श्रेया से फोन पर बात की।
हमने पूछा- पढ़ाई में आपका बैकग्राउंड कैसा रहा है? वह बताती हैं- मेरा घर लखनऊ के आशियाना में है, मैंने लॉ मार्टिनियर कॉलेज से पढ़ाई की। लखनऊ की डॉ. अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल में इंजीनियरिंग की। 2019 में पढ़ाई पूरी हो गई। उसी वक्त सोच लिया था कि अब सिविल सेवा की तैयारी करनी है।
हमने पूछा- आपने कितने अटेम्ट दिए? श्रेया बताती हैं- मेरे पापा संजय शर्मा रेलवे में नौकरी करते थे, भाई शुभम भी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग कर रहा था। उसने मुझे बहुत मोटिवेट किया। उसे मुझपर भरोसा था, कहता था कि तुम कर जाओगी। मैंने यूपीएससी की दो बार परीक्षा दी, दोनों ही बार सफलता नहीं मिली। उसके बाद तय किया कि अब यूपीपीसीएस एग्जाम देंगे।
2023 में प्री परीक्षा पास कर ली, एक उम्मीद जग गई। लेकिन मेंस नहीं निकला। इस तरह से एक बार फिर से मन निराश हो गई।
हमने पूछा- फिर शादी होने के बाद कैसे तैयारी की? वह कहती हैं- 20 फरवरी, 2025 को मेरी अमित से शादी हो गई। मैं प्रयागराज में अपनी ससुराल में रहने के दौरान भी लगातार तैयारी करती रही। उस वक्त एक पल के लिए भी नहीं लगा कि मैं अपने ससुराल में हूं।
जैसे लखनऊ में अपने घर पर पढ़ाई करती थी, वैसे ही वहां भी कर रही थी, अच्छी बात तो यह थी कि वहां मुझे ननद आकृति के रूप में एक साथी मिल गई थी। हम दोनों में एक कंपटीशन शुरू हो गया। राइटिंग स्किल से लेकर टिपिकल सब्जेक्ट पर हम एक दूसरे की मदद करने लगे।
हमने पूछा- ये सब कितना मददगार हुआ? वह कहती हैं- आकृति दो बार यूपी पीसीएस की परीक्षा में बैठ चुकी थीं, लेकिन दोनों ही बार वह प्री से बाहर हो गई थी। उनका मनोबल टूट सा गया था। परिवार में बाकी लोगों ने उन्हें हिम्मत दी।
पिता अखिलेश कहते कि ये आसान नहीं है, थोड़ा ज्यादा मेहनत तो लगेगी। अब चूंकि घर में मैं भी आ गई थी, इसलिए आकृति की हिम्मत बढ़ गई। हम दोनों दोस्तों की तरह रहने लगे। इससे पढ़ाई में भी मदद मिली।

