पहाड़ों पर बर्फ, दिल्ली-NCR में बारिश
Delhi NCR rain-cold impact on Health: वसंत पंचमी के दिन अचानक मौसम में बदलाव हुआ है. पहाड़ों पर बर्फबारी से हाड़ गलाने वाली ठंड बढ़ गई है. जबकि दिल्ली-यूपी में भारी बारिश और तेज हवाओं के चलते लोगों की कंपकंपी छूट रही है. तापमान में गिरावट से एक बार फिर शीतलहर चलने और कड़कड़ाती ठंड पड़ने की संभावना है. ऐसे में ठंडी हवाओं, बर्फबारी और कूल-कूल मौसम का मजा लेने से पहले ये जानना बेहद जरूरी है कि अचानक लौटी यह ठंड सेहत पर कितना खराब असर डालेगी?
ठंड और बर्फबारी दोनों के असर अलग-अलग होते हैं. जब ज्यादा ठंड होती है तो बॉडी का मेकेनिज्म बॉडी के अंदर की हीट को बचाकर रखने का काम करता है और इस बात को सुनिश्चित करता है कि शरीर के सभी अंगों तक ब्लड की सप्लाई पहुंचे. शरीर की गर्मी बाहर न निकले, इसके लिए हाथों और पैरों की पेरिफेरल आर्टरीज सिकुड़ जाती हैं, इसे कंस्ट्रिक्शन कहते हैं. ऐसा होने से शरीर का हीट लॉस तो कम हो जाता है लेकिन हाथों और पैरों की उंगलियां नीली पड़ जाती हैं और उनका ब्लड फ्लो कम हो जाता है. अगर यही एक्सपोजर ज्यादा दिनों तक बना रहे तो इस कारण से गैंगरीन भी हो सकती है.’
कई बार इतनी ठंड पड़ती है कि हमारे शरीर की उंगलियों के बॉडी सेल्स का पानी भी फ्रीज हो जाता है, या उसके सेल्स के बीच में जो पानी है वह सिकुड़ जाता है, इसे फ्रॉस्ट बाइट बोलते हैं, इसके चलते परमानेंट नुकसान यानि उंगलियां गल जाती हैं और काटने तक की नौबत आ जाती है. कई बार बर्फबारी वाले इलाकों में फॉल्स की समस्या होती है. चिकनी बर्फ पर फिसलने से फ्रैक्चर और शारीरिक चोटें आ सकती हैं.
जब सर्दी तेज बढ़ती है तो उसमें ड्राइनेस हो जाती है और इससे अस्थमा का अटैक होने की संभावना बढ़ जाती है. कुछ लोग इसको कोल्ड अस्थमा बोलते हैं लेकिन ह्यूमेडिफिकेशन नहीं होता. ठंड के कारण हमारे रिसेप्टर एक्टिवेट हो जाते हैं और इम्यूनिटी भी कम होती है.

