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क्या थर्ड वर्ल्ड वार शुरू? यूक्रेन, ईरान के बाद दक्षिण चीन सागर में हलचल

Third World War: विश्व युद्ध की आशंका इन दिनों चरम पर पहुंच गई है. मार्च 2026 के मध्य में वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य तीन प्रमुख मोर्चों पर उबाल पर है. यूक्रेन में रूस का आक्रमण, मध्य पूर्व में अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान का सीधा युद्ध और अब दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता. पूर्व नाटो कमांडरों और भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ये तीनों संघर्ष एक-दूसरे से जुड़कर दुनिया को थर्ड वर्ल्ड वार की दहलीज पर खड़ा कर रहे हैं. विशेष रूप से दक्षिण चीन सागर में हाल की घटनाओं ने जापान, वियतनाम, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस जैसे देशों में चिंता बढ़ा दी है. दक्षिण चीन सागर में चीन की हजारों मछली पकड़ने वाली नौकाओं की असामान्य गतिविधियां देखी जा रही है.

हमलों ने ईरान के खर्ग द्वीप को निशाना बनाया है. यह ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है. खर्ग के बंदरगाह से ही ईरान करीब 90 फीसदी तेल का निर्यात करता है. मौजूदा वक्त में चीन ईरान से तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. ऐसे में खर्ग पर हमला सीधे तौर पर चीन के हितों पर हमला है.

उधर जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजराइल पर मिसाइलों की बारिश कर रहा है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया. इस बंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी कमी आई है, जिससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इतिहास की सबसे बड़ी आपातकालीन तेल रिलीज की घोषणा की, लेकिन संकट गहराता जा रहा है. ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने स्पष्ट कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा, जिससे यूरोप और एशिया में ऊर्जा संकट और गहरा गया है

इस बीच, पूर्वी यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है. रूस ने मिसाइल अभियानों को तेज किया है, जबकि अमेरिका अपनी सेना और संसाधनों का बड़ा हिस्सा ईरान मोर्चे पर स्थानांतरित कर चुका है. यूक्रेन को नाटो से सहायता मिल रही है, लेकिन अमेरिकी हथियारों की कमी के कारण खालीपन पैदा हुआ है. रूस ने हाल ही में अपनी मांगों को और सख्त किया है, जिससे नाटो के साथ टकराव की आशंका और बढ़ गई है. यही नहीं ईरान संकट में तेल के भाव बढ़ने से रूसी तेल की डिमांड बढ़ी है और वह जमकर कमाई कर रहा है. यानी बीते 15 दिनों में रूस की आर्थिक ताकत बढ़ी है वहीं यूक्रेन को अमेरिकी समर्थन में कमी आई है. ऐसे में यदि रूस किसी नाटो सदस्य देश पर हमला करता है, तो यह वैश्विक संघर्ष में बदल सकता है.

Umh News india

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