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ट्रम्प बोले- ईरान के तेल पर कब्जा मेरी पसंदीदा चीज

ट्रम्प ने कहा है कि वह ईरान का तेल अपने कंट्रोल में लेना चाहते हैं। रविवार को फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने यह बयान दिया।

ट्रम्प ने कहा, ‘सच कहूं तो मेरी पसंदीदा चीज है ईरान का तेल लेना। इसपर कब्जे के लिए अमेरिका के पास कई विकल्प हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘अमेरिका में कुछ लोग कहते हैं आप ऐसा क्यों कर रहे हैं?’ लेकिन वे बेवकूफ हैं।’

उन्होंने खार्ग द्वीप का जिक्र करते हुए कहा, ‘हो सकता है हम खार्ग द्वीप ले लें, हो सकता है नहीं।’ ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि इस द्वीप पर ईरान की रक्षा ज्यादा मजबूत नहीं है और अमेरिका इसे आसानी से अपने कब्जे में ले सकता है।

खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में स्थित है। यह ईरान का अहम तेल केंद्र है। यहां से ईरान का करीब 90 प्रतिशत तेल निर्यात होता है।

ट्रम्प ने यह भी कहा है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए जल्द समझौता हो सकता है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तेहरान ने अमेरिका का प्रस्ताव नहीं माना, तो उनके पास देश ही नहीं बचेगा।

ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने निवेशकों को सलाह दी है कि ट्रम्प के बयानों पर तुरंत भरोसा करके फैसला न लें। उनका कहना है कि जब अमेरिकी बयान से बाजार तेजी से ऊपर-नीचे हो, तो उसी दिशा में चलने के बजाय उल्टा सोचकर कदम उठाना बेहतर हो सकता है।

उन्होंने कहा कि ट्रम्प के बयान का फायदा बाजार के बड़े खिलाड़ी उठा रहे हैं। ट्रम्प ने 22 मार्च को कहा था कि ईरान के साथ अच्छी बातचीत और उसके एनर्जी ठिकानों पर हमले टाल दिए गए हैं। इससे बाजार में राहत आई, अमेरिकी शेयर बाजार चढ़े और तेल की कीमतें गिर गईं।

लेकिन कुछ ही दिनों बाद हालात बदल गए। ट्रम्प ने फिर सख्त बयान दिए, इजराइल ने तेहरान पर हमले किए और सऊदी अरब में ड्रोन इंटरसेप्शन की खबरें आईं। इसके बाद बाजार पलट गया। शेयर गिरे और तेल की कीमतें फिर बढ़ गईं।

कुछ ट्रेडर्स का कहना है कि बड़े एलान से पहले ही बाजार में अचानक ज्यादा खरीद-फरोख्त होने लगती है, जिससे लगता है कि कुछ लोगों को खबर पहले से मिल जाती है।

गालिबाफ ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी सेना ईरान में घुसती है, तो उसे कड़ा जवाब मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका सार्वजनिक रूप से बातचीत की बात करता है, लेकिन अंदर ही अंदर सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत से इनकार किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अब तक दोनों देशों के बीच सिर्फ मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है।

उन्होंने बताया कि अमेरिका ने बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन उसकी ओर से भेजी गई शर्तें अतार्किक हैं। बघाई ने कहा कि ईरान का रुख शुरू से स्पष्ट रहा है, जबकि अमेरिका बार-बार अपनी स्थिति बदल रहा है।

ईरान ने यह भी कहा कि उसे पूरी तरह पता है कि वह किस ढांचे में बातचीत पर विचार करेगा। प्रवक्ता ने अमेरिकी कूटनीति पर तंज करते हुए कहा कि वहां खुद लोग उसके दावों को कितनी गंभीरता से लेते हैं।

पाकिस्तान में हुई बैठकों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने कहा कि ये उनकी अपनी पहल है और तेहरान इसमें शामिल नहीं हुआ। उसने मिडिल-ईस्ट के देशों से कहा कि वे युद्ध खत्म करने की कोशिश करें, लेकिन यह भी ध्यान रखें कि संघर्ष की शुरुआत किसने की थी।

Umh News india

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