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UP में UGC ने बढ़ाई भाजपा की मुश्किलें

हिंदू वोट बैंक को भाजपा के पक्ष में लामबंद करने के लिए सीएम योगी ने ‘बंटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे’ का नारा दिया। वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी ने नारा दिया ‘एक रहेंगे तो नेक रहेंगे।’

पिछले डेढ़ साल से पार्टी जाति की जगह धर्म के नाम पर वोटरों को जोड़ने की कोशिश कर रही थी, लेकिन यूजीसी के नए नियमों ने इस रणनीति को झटका दे दिया। अब हिंदू वोट बैंक फिर से जातियों में बंटने लगा है।

विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश भर से मिल रहे फीडबैक ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है प्रदेश भाजपा को अब केंद्र के निर्णय और रणनीति का इंतजार है, जिससे कुछ राहत मिल सके। लोकसभा चुनाव 2024 में यूपी में समाजवादी पार्टी के पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक (पीडीए) का नारा भाजपा के राष्ट्रवाद और हिंदुत्व पर भारी पड़ा। भाजपा (एनडीए) के सांसदों की संख्या 66 से घटकर 36 पर सिमट गई थी। वहीं, सपा के 37, कांग्रेस के 6 सहित इंडिया गठबंधन के 43 सांसद चुने गए। चुनाव के बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने माना कि भाजपा, आरएसएस के धर्म के कार्ड के आगे सपा का जाति वाला दांव ज्यादा असरदार रहा।

लोकसभा चुनाव की हार से सबक लेते हुए भाजपा और आरएसएस ने सपा के पीडीए की काट खोजना शुरू की। तब उच्च स्तरीय मंथन में सामने आया कि हिंदुओं को फिर से एक करना होगा। उसी दौरान बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले हो गए। सीएम योगी ने उनका हवाला देकर देश-प्रदेश के हिंदुओं को एक करने के लिए नारा दिया ‘बंटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे’।

योगी के इस नारे को आरएसएस का भी पूरा समर्थन मिला। मथुरा में आयोजित आरएसएस की बैठक में संघ ने भी माना कि ‘बंटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे।’ उसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने योगी की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि ‘एक रहेंगे तो नेक रहेंगे।’

भाजपा की हिंदुत्व की राजनीति काम कर गई। हिंदू वोट बैंक को एकजुट कर भाजपा ने 2024 और 2025 में उप चुनाव भी जीते। भाजपा, आरएसएस और संगठन बीते करीब डेढ़ साल से सपा के पीडीए के खिलाफ हिंदुओं को जाति की जगह धर्म के नाम पर एकजुट करने में लगे हुए थे।

लेकिन, जनवरी 2026 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों ने ऐसा बिखराव किया कि यूपी ही नहीं पूरे देश में सवर्ण (अगड़े) बनाम पिछड़ा-दलित की राजनीति शुरू हो गई। सवर्ण युवाओं से लेकर अधिकारी, महिलाएं, बुजुर्ग, नौकरीपेशा और प्रबुद्धजनों ने खुलकर इसका विरोध किया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से फिलहाल स्टे लग गया है।

भाजपा ने कोर वोटर को नाराज किया

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ और भूमिहार समाज भाजपा का कोर वोटर है। भाजपा की नींव ही इन्हीं समाजों के वोट बैंक पर टिकी है। लेकिन केंद्र सरकार ने यूजीसी के नए नियम लाकर अपने कोर वोट बैंक को ही नाराज कर दिया है। जबकि, देश में कोई भी दूसरा दल किसी भी कीमत पर अपने कोर वोटर्स को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाता।

भाजपा के गठन से लेकर अब तक के इतिहास में यह पहला मौका है, जब कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने किसी निर्णय को लेकर पार्टी से इस्तीफे दिए। इतना ही नहीं पार्टी के झंडे तक अपने घरों से उखाड़ कर फेंक दिए।

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