डॉक्टर द्वारा रची गई सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश
सागर। जिले में सामने आए एक गंभीर और सनसनीखेज मामले का पुलिस ने त्वरित एवं वैज्ञानिक जांच के माध्यम से खुलासा किया है। इस प्रकरण में मुख्य आरोपी एक डॉक्टर है, जिसने अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर अपनी ही पत्नी की हत्या की साजिश रची और बाद में घटना को सड़क दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया।
घटना का विवरण
दिनांक 21 मार्च 2026 की रात्रि लगभग 4:00 बजे आरोपी डॉक्टर अपनी पत्नी को कार में लेकर चनाटोरिया टोल टैक्स के पास पहुंचा। घटना से पहले आरोपी ने पत्नी के मायके पक्ष को फोन कर बताया कि उसकी पत्नी को हार्ट अटैक आया है और वह उसे अस्पताल लेकर जा रहा है।
कुछ समय बाद आरोपी ने दोबारा फोन कर जानकारी दी कि गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है और उसमें आग लग गई है।
संदेह और जांच
घटना प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत होने पर पुलिस ने मामले की सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी डॉक्टर के किसी अन्य महिला से अवैध संबंध थे, जिसके चलते पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद होता रहता था। इसी वजह से आरोपी ने अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर पत्नी की हत्या की साजिश रची।
षड्यंत्र और लालच
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी डॉक्टर ने अपने दोनों सहयोगियों को इस अपराध में शामिल करने के लिए प्रत्येक को 2-2 लाख रुपये देने का लालच दिया था। तीनों के बीच पहले से घनिष्ठ संबंध थे, जिसके कारण यह अपराध सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।
साक्ष्य एवं बरामदगी
आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त
पेट्रोल से भरी कुप्पी
माचिस
घटनास्थल के पास झाड़ियों से विधिवत जब्त की गई। ये वस्तुएं इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जा रही हैं।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक श्री विकास कुमार शाहवाल एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री लोकेश कुमार सिन्हा के निर्देशन में थाना प्रभारी सानोधा द्वारा अत्यंत सूक्ष्मता और पेशेवर ढंग से जांच की गई। साक्ष्यों के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए निम्न आरोपियों को गिरफ्तार किया गया—
नीलेश, पिता भागवत कुर्मी, उम्र 37 वर्ष, निवासी ग्राम सिमरिया, थाना गढ़ाकोटा
रामकृष्ण, पिता हरगोविंद कुर्मी, उम्र 25 वर्ष, निवासी ग्राम कुमेरिया भटोली, थाना गढ़ाकोटा
शुभम, पिता गोपाल कुर्मी, उम्र 23 वर्ष, निवासी ग्राम सिंगपुर कला, थाना गढ़ाकोटा, हाल बजरंग वार्ड गढ़ाकोटा
प्रकरण की विवेचना में थाना प्रभारी भरतसिंह ठाकुर तथा थाना स्टाफ के सहायक उप निरीक्षक जयसिंह, शेषनारायण दुबे, प्रधान आरक्षक पुरुषोत्तम, उमेश, राजेश, विष्णु, आरक्षक जगदीश, राजेन्द्र, प्रमोद, राहुल, हेमंत, देवेन्द्र और नीरज की सराहनीय भूमिका रही।
निष्कर्ष
पुलिस की प्रभावी और वैज्ञानिक जांच से स्पष्ट हुआ कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या का मामला था, जिसमें सबूत छिपाने के उद्देश्य से वाहन में आग लगाकर दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई।
सागर पुलिस आमजन की सुरक्षा हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है। किसी भी गंभीर अपराध को छिपाने या भ्रामक रूप देने का प्रयास करने वालों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

