नवरात्रि के 9 दिनों में क्यों बढ़ जाती है तांत्रिक क्रिया
Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि आते ही माहौल बदल जाता है घर-घर में दीप जलते हैं, मंदिरों में घंटियां गूंजती हैं और मन अपने आप ही भक्ति की ओर खिंच जाता है. लेकिन इस बार की चैत्र नवरात्रि सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति ऐसी बन रही है जो तांत्रिक साधनाओं और ऊर्जा जागरण के लिए बेहद खास मानी जा रही है. आमतौर पर लोग इसे भक्ति का पर्व मानते हैं, पर इसके पीछे एक गहरा, रहस्यमय और आध्यात्मिक पक्ष भी छिपा होता है
ग्रहों की चाल और नवरात्रि की ऊर्जा
ज्योतिष शास्त्र कहता है कि नवरात्रि के दौरान चंद्रमा की स्थिति और शक्ति का विशेष प्रभाव होता है. इस बार चंद्रमा की स्थिति कुछ ऐसे योग बना रही है, जो मानसिक एकाग्रता और ध्यान के लिए अनुकूल हैं. यही वजह है कि साधक इन दिनों में तांत्रिक क्रियाओं को ज्यादा प्रभावी मानते हैं.
कई ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जब चंद्र और मंगल जैसे ग्रह अनुकूल स्थिति में होते हैं, तब ऊर्जा का स्तर बढ़ता है. यही ऊर्जा तंत्र साधना में मदद करती है. गांवों से लेकर बड़े शहरों तक, कई लोग इस दौरान विशेष मंत्र जाप और साधनाएं करते नजर आते हैं.
शक्ति उपासना का खास समय
नवरात्रि को देवी शक्ति की उपासना का पर्व माना जाता है, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से ये समय ‘ऊर्जा सक्रियण’ का होता है. साधक इस दौरान दुर्गा सप्तशती, देवी महात्म्य और अन्य ग्रंथों का पाठ करते हैं, जिससे उन्हें मानसिक और आध्यात्मिक बल मिलता है.
पंडित जी के अनुसार जिन जातकों की कुंडली में चंद्र कमजोर स्थिति में हो या पापी ग्रह के साथ हो ऐसे जातकों पर टोना-टोटका या तांत्रिक क्रियाओं का असर ज्यादा होता है.

