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लट्‌ठमार होली के लिए लाठी पर तेल लगा रहीं महिलाएं

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नंदगांव और बरसाना लट्‌ठमार होली के लिए तैयार है। नंदगांव यानी जहां श्रीकृष्ण ने अपना बचपन बिताया। प्रभु के सखा स्वरूप में ग्वाले 50Km दूर बरसाना पहुंचेंगे। यहां राधा रानी की सखियों के स्वरूप में हुरियारने उन पर लाठियां बरसाएंगी।

शनिवार को दोपहर 12 बजे नंदगांव के हुरियारे बरसाना के पीली पोखर पहुंचेंगे। यहां पगड़ी बांधने और श्रृंगार के बाद वह लाडलीजी के दर्शन करेंगे। इसके बाद करीब 3km के दायरे में फैली कुंज गलियों से वह गुजरेंगे।

जब हुरियारने ग्वालों पर लाठियां बरसा रही होंगी, तब उन्हें देखने के लिए करीब 10 लाख टूरिस्ट बरसाना में मौजूद रहेंगे। बरसाना में एंट्री करते ही एक बड़ा सा गेट मिला। जिस पर लिखा था म्हारो प्यारो बरसाना। सबसे पहले हमने हुरियारनों की तलाश शुरू की, ताकि पता चल सके कि उनकी तैयारी कैसी चल रही है। कुछ लोग हमें एडवोकेट गोकुलेश कटारा के घर तक पहुंचा गए। यहां उनकी पत्नी राधा कटारा लाठी पर तेल लगाते हुए मिली। राधा ने बताया- मेरा मायका दिल्ली में है। केवल सुना था कि बरसाना की लट्ठमार होली होती है। अब जब शादी करके बरसाना ससुराल बनी, तो धन्य हो गई।

हमने पूछा कि इस त्योहार के लिए तैयारी कैसे करते हैं। उन्होंने कहा- लट्ठमार होली के लिए लाठी पर करीब 15 दिन पहले से सरसो का तेल लगाना शुरू कर देते हैं। इससे लचक बढ़ जाती है।

हमने पूछा कि लाठियों का साइज कैसे तय करते हैं। उन्होंने कहा- यह हुरियारन की लंबाई पर निर्भर करता है, ताकि वह आसानी से लाठी चला सके। साथ ही, सखियों की डाइट भी बदल जाती है। पौष्टिक आहार एक महीने पहले से बढ़ा देते हैं। ताकि लाठी की मार में दम लग सके और उस दिन थकावट न महसूस हो। आगे बढ़ने पर ब्रज दूल्हा मंदिर के सामने एक घर में महिलाएं होली के गीत, रसिया गाते हुए हाथों में लाठियां लिए हुए मिलीं। पता चला कि यहां लट्ठमार होली के लिए तैयारियां कर रही हैं। यहां कमरे में मौजूद विमला देवी ने कहा- बरसाना से करीब 1000 हुरियाने तैयार हो रही हैं। नए परिधान बनवाए जा रहे हैं।

हमने पूछा- क्या कोई भी लड़की हुरियारन बन सकती है? विमला ने कहा- नहीं…। सिर्फ वही लड़की हुरियारन बनती है, जो बरसाना की बहू हो। कुंवारी लड़कियां इसमें शामिल नहीं होती। वो सिर्फ देखती हैं। बरसाना के सभी लोगों को इस त्योहार का पूरे साल इंतजार रहता है। तैयारियां भी महीने भर पहले से होती हैं। ऐसा लगता है कि सभी श्रीकृष्ण की सखियां हैं। ग्वाल चिढ़ाएंगे तो उन्हें सबक सिखाने का मौका मिलेगा। सबका यही भाव रहता है।

हुरियारनों से बात समझने के बाद हम आगे बढ़े तो रास्ते में मजदूर सड़क की मरम्मत करते दिखे। भीड़ नियंत्रण के लिए रेलिंग लगाई जा रही थी। मजदूरों ने बताया कि उन्हें यह काम 6 मार्च से पहले पूरा करना है। 8 मार्च को लट्‌ठमार होली खेली जानी है।

इस बार उम्मीद है कि बरसाना में 50 हजार किलो गुलाल उड़ा दिया जाएगा। बरसाना में जगह-जगह सेल्फी पॉइंट बनाए गए हैं। स्वागत द्वार से करीब 100 मीटर की दूरी पर नया सेल्फी प्वाइंट है। यहां राधा रानी की प्रतिमा भी लगी है।

सेल्फी प्वाइंट के आसपास दुकानों और ठेलों पर रंग, गुलाल बिक रहा है। दुकानदार होली के दौरान गुलाल बेचने के लिए छोटी-छोटी पैकिंग तैयार कर रहे हैं। लट्ठमार होली की एक और खासियत यह है कि नंदगांव के हुरियारें ढाल तैयार करवाने के लिए बरसाना आते हैं। यहां एक एकमात्र रमेश मिस्त्री हैं, जो ढाल तैयार करते हैं।

नंदगांव के सुशील गोस्वामी ने कहा – श्रीमदभागवत में भी जिक्र मिलता है कि जब श्रीकृष्ण का राधा रानी से विवाह हुआ। उसके बाद जिस तरह वह दूल्हे की तरह सजकर पहुंचे थे। सखियां गीत गाती हैं- चल री सखी ठाकुरजी दूल्हा बनकर आए। तब कोठे पर चढ़ी सखियां श्याम सुंदर पर फूल मारती हैं। अब भी वही परंपरा चली आ रही है।

आज भी हुरियारे श्रीकृष्ण के सखा के रूप में नंदगांव से बरसाना आते हैं, दूल्हा की तरह श्रृंगार करते हैं। यहां राधा रानी की सखियां उनके ऊपर प्रेम के साथ लाठी मारती हैं।

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