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होर्मुज के बाद एक और खतरा, आंसुओं के दरवाजे पर ईरान के ‘गब्बर’ का गदर

होर्मुज स्ट्रेट की ईरानी नाकेबंदी से उभरे संकट का दुनिया अभी तक हल ढूंढते में जुटी है. उधर बगल के ही एक बड़े समुद्री मार्ग पर नया खतरा खड़ा हो गया है. यह टेंशन लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को लेकर है, जो अब ईरान की अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जंग का दूसरा मोर्चा बनता जा रहा है. दरअसल यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही भी इस युद्ध में कूद गए हैं. इसके बाद से एक्सपर्ट्स को चिंता सताने लगी कि अगर हूतियों ने यमन के पास इस संकरे समुद्री मार्ग पर भी होर्मुज वाला प्लान लागू कर दिया, तो आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ी ऊर्जा और व्यापार संकट पैदा हो सकता है.

क्यों कहा जाता है आंसुओं का दरवाजा?

बाब अल-मंदब एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘आंसुओं का दरवाजा’… यह स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है. लगभग 100 किलोमीटर लंबा और 30 किलोमीटर चौड़ा यह मार्ग यमन को हॉर्न ऑफ अफ्रीका कहे जाने वाले जिबूती और इरिट्रिया से अलग करता है.

एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों को स्वेज नहर पहुंचने के लिए इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है. दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस शिपमेंट्स का 10 से 12 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है. साथ ही वैश्विक व्यापार का करीब 12 प्रतिशत और स्वेज नहर से गुजरने वाले कंटेनर ट्रैफिक का 40 प्रतिशत इसी मार्ग पर निर्भर है.

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद से सऊदी अरब जैसे देश इसी समुद्री मार्ग के जरिये दुनिया को कच्चा तेल सप्लाई कर रहे हैं. सऊदी अरब अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए कच्चा तेल यनबू बंदरगाह तक पहुंचाता है और फिर लाल सागर के रास्ते दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है. ऐसे में होर्मुज के बाद इस प्वाइंट का चोक होना दुनिया के लिए बड़ी विपदा जैसा होगा.

Umh News india

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