आगरा पुलिस ने वीडियो बनाने पर दी थर्ड डिग्री: युवक के नाखून खींचे
‘4 पुलिस वालों ने मेरे पैर के तलवों पर डंडे बरसाए। मारते-मारते 2 डंडे टूट गए, लेकिन वे नहीं रुके। इसके बाद वे मिर्च ले आए और मेरे जख्मों पर झोंक दिया। मैं दर्द से कराहता रहा और उनके पैरों से लिपटकर रोता रहा कि मुझे छोड़ दो, लेकिन उनका दिल नहीं पसीजा।’ यह कहना है आगरा की एक पुलिस चौकी में पुलिसकर्मियों द्वारा पिटाई का आरोप लगाने वाले नरेंद्र का।
उन्होंने कहा- इतना ही नहीं, मैं बार-बार कहता रहा कि मेरे घरवालों को बता दो। मैं यहां हूं, लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं सुनी। इसके बाद चौकी इंचार्ज ने मेरा मोबाइल फोन और जेब में रखे 1800 रुपए भी छीन लिया।
वहीं, सपा ने भी इस मामले में लेकर थाने का घेराव किया। सैंया थाना क्षेत्र के वीरई गांव निवासी नरेंद्र कुशवाह अपने बड़े भाई धीरज के साथ टेंपो से आगरा शहर में घर-घर दूध बेचने का काम करते हैं। टेंपो धीरज चलाते हैं, जबकि नरेंद्र को टेंपो चलाना नहीं आता।
नरेंद्र ने बताया- शुक्रवार यानी 2 जनवरी को मैं रोज की तरह भाई धीरज के साथ दूध बांटने छत्ता थाना क्षेत्र की जीवनी मंडी चौकी अंतर्गत गरीब नगर गया था। धीरज मुझे टेंपो में छोड़कर घरों में दूध देने चले गए थे।
दोपहर करीब 11 बजे जीवनी मंडी चौकी इंचार्ज रविंद्र कुमार किसी झगड़े की सूचना पर वहां पहुंचे। उन्होंने झगड़ा करने के आरोप में कुछ युवकों को पकड़ा और फिर मेरे पास आकर कहा कि टेंपो में बैठाकर इन युवकों को थाने ले चलो।
इस पर मैंने कहा- मुझे टेंपो चलाना नहीं आता। यह सुनते ही वह भड़क गए और मेरे गाल पर 2 तमाचे जड़ दिया। इसके बाद उन्होंने अपना मोबाइल निकालकर पुलिस का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। इससे पुलिसकर्मियों का पारा और चढ़ गया। उन्होंने मेरा मोबाइल छीन लिया और मुझे जबरन खींचकर पुलिस चौकी ले गए। वहां पर पहुंचते ही चौकी प्रभारी ने पहले मुझे जमीन पर गिराकर पीटने लगे। मारते-मारते 2 डंडे तोड़ दिए नरेंद्र ने आगे बताया- चार पुलिसकर्मियों ने मेरे पैर के तलवों पर डंडे बरसाए। मारते-मारते दो डंडे टूट गए, लेकिन वे नहीं रुके। इसके बाद वे मिर्च ले आए और मेरे जख्मों पर मिर्च झोंक दी। मैं दर्द से कराहता रहा। बचने के लिए मैंने पुलिस वालों के पैर पकड़ लिए और पैरों से लिपटकर रोने लगा, मगर उनका दिल नहीं पसीजा। मैं चीख रहा था। बचने के लिए गिड़गिड़ा रहा था, लेकिन पुलिस वाले हंसते हुए पिटाई कर रहे थे।
इतना ही नहीं, मैं बार-बार कहता रहा कि मेरे घरवालों को बता दो कि मैं यहां हूं, लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं सुनी। इसके बाद चौकी इंचार्ज ने मेरा मोबाइल फोन और जेब में रखे 1800 रुपए भी छीन लिए।
इंस्पेक्टर के सामने कुछ बोला तो जेल में सड़ जाओगे इसके बाद मुझे शाम को ऑटो में डालकर थाना छत्ता ले जाया गया और वहां हवालात में बंद कर दिया गया। चौकी इंचार्ज ने मुझे धमकाया कि इंस्पेक्टर के सामने कुछ भी मत कहना, अगर कुछ कहा तो जेल में सड़ जाओगे। इस धमकी से मैं इतना डर गया कि इंस्पेक्टर के सामने कुछ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।
आरोप है कि इंस्पेक्टर ने उसका शांतिभंग में चालान करने के निर्देश दे दिए। इसके बाद उसके परिजनों को मामले की सूचना दी गई। इतना ही नहीं मेडिकल में भी उसकी चोट को छिपा दिया गया।
पीड़ित ने डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास से शिकायत की। डीसीपी ने बताया- पूरे मामले की जांच कराई गई। सभी आरोप सही पाए गए हैं। इस पर चौकी इंचार्ज रविंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही इंस्पेक्टर छत्ता को भी लाइन हाजिर किया गया है। पूरे मामले की जांच एसीपी छत्ता को दी गई है। अन्य पुलिसकर्मियों की संलिप्तता पाए जाने पर उन पर भी कार्रवाई होगी।

