बड़ा दावा : 6 साल में एक बार भी नहीं बढ़ी बिजली की दर : ऊर्जा मंत्री एके शर्मा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही 11 बजे शुरू हुई. इस कार्यवाही में कई मुद्दों पर विपक्ष और भारतीय जनता पार्टी आमने-सामने आए. जहां ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि छह साल से कोई बिजली दर नहीं बढ़ी. वहीं, कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि प्रदेश में आईटीआई को चलाने के लिए पीपीपी मॉडल अपनाया गया. इससे गरीबों पर महंगी फीस का बोझ पड़ रहा है. आइए जानते हैं पल-पल के अपडेट्स..
एक भी कर्मचारी ने हड़ताल नहीं की
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सपा के लोगों ने प्रदेश को बीमारू बनाकर रखा था. हमारी सरकार की कोशिशों से अब प्रदेश में बिजली की खपत प्रति व्यक्ति 724 यूनिट हो गई है. यह पहली बार हुआ है जब गरीब उपभोक्ताओं के बिल जमा करने पर 25 प्रतिशत की छूट दी गई और किसानों के बिजली के बिल माफ किए गए हैं. बिजली के निजीकरण पर की जा रही चर्चाओं पर ऊर्जा मंत्री ने कहा कि मैंने पहले भी कहा है कि हम जो भी करेंगे वो राज्य के जनता के हित में, पिछड़ों के हित में और पिछड़े क्षेत्रों के विद्युतीकरण को ध्यान में रखते हुए करेंगे. उन्होंने कहा कि विपक्ष के लोग कर्मचारियों के हित की बात करते हैं लेकिन एक भी कर्मचारी ने हड़ताल नहीं की है.
बुधवार को बिजली व्यवस्था के मुद्दे पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और सपा सदस्यों के बीच जमकर जुबानी तीर चले. वहीं, शिक्षामित्रों के मानदेय, ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी तैनाती और शिक्षकों को चिकित्सकीय सुविधा दिये जाने पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने सदन में जवाब दिया. आज भी सदन के हंगामे और शोरशराबे युक्त होने के आसार हैं.
क्या बोले योगी के मंत्री?
यूपी के ऊर्जा मंत्री ने सदन में बिजली के निजीकरण को लेकर जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब छह साल में एक भी पैसा बिजली की दरें नहीं बढ़ाई गई हैं. यह 2017 के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब प्रदेश के हर नागरिक तक बिजली पहुंचाने का काम किया गया. अब लोगों को निर्बाध, बिना रुकावट बिजली मिल रही है. यह डबल इंजन की सरकार के कारण ही है कि यूपी देश में पहली बार सर्वाधिक बिजली आपूर्ति करने वाला राज्य बना.
यूपी को निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बनाने के लिए सरकार ने 32 से अधिक नीतियां बनाई
यूपी में निवेश को लेकर किए गए सवालों के जवाब में प्रदेश के औद्योगिक मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि प्रदेश को निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बनाने के लिए सरकार ने 32 से अधिक नीतियां बनाई हैं जिसके तहत निवेश के प्रस्तावों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में निवेश को बढ़ावा देने के साथ ही पिछड़े जिलों को वरीयता दी गई है जिसमें पूर्वांचल और बुंदेलखंड को विशेष महत्व दिया गया है. ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां पर औद्योगिक इकाइयां स्थापित नहीं की गई हैं. डबल इंजन की सरकार ने सीतापुर से लेकर सहारनपुर तक और हमीरपुर से लेकर गोरखपुर तक विकास की रोशनी से जगमगा रहा है. हमारी कथनी और करनी एक है यही कारण है कि हमने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित किया है.
‘गरीबों पर महंगी फीस का बोझ पड़ रहा’
कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि प्रदेश में आईटीआई को चलाने के लिए पीपीपी मॉडल अपनाया गया. इससे गरीबों पर महंगी फीस का बोझ पड़ रहा है. क्या सरकार अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करेगी या फिर गरीबों की कैसे मदद करेगी. उन्होंने कहा कि कई जगहों पर आईटीआई की बिल्डिंग बनकर तैयार है पर उनका संचालन नहीं हो रहा है. इससे युवाओं को कक्षाओं के लिए दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है. सरकार इस समस्या को कैसे संबोधित कर रही है. इस पर जवाब देते हुए सरकार की ओर से कहा गया है कि जो संस्थान नहीं चल रहे हैं वहां स्टाफ का रिक्रूटमेंट कर जल्दी ही संचालित किया जाएगा.

