बुलंदशहर : कुख्यात डकैत ने CBI ऑफिसर बनकर व्यापारी को लूटा
अनूपशहर में एक बिल्डिंग मैटेरियल व्यापारी के घर फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर की गई लूट की वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस लूट को कुख्यात अपराधी इंदरपाल उर्फ ताऊ ने अंजाम दिया था। इंदरपाल उर्फ ताऊ वही अपराधी है, जिसने वर्ष 2014-15 में नगर के एलएम ज्वैलर्स पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी डकैती को अंजाम दिया था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस लूट की पूरी योजना दुकान के एक पूर्व मजदूर ने बनाई थी, जिसने रेकी कराने में भी अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने इंदरपाल उर्फ ताऊ, पूर्व मजदूर समेत कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से लूट का करीब 40 लाख रुपए मूल्य का सोना और 12.35 लाख रुपए की नकदी बरामद की गई है। एक आरोपी अंकुर फरार है इसके पास दो सोने के कड़े हैं। आरोपियों ने करीब 10 तोले सोने की एक मुहर 12 लाख रुपए में अलीगढ़ में बेची थी, जिसमे से आठ लाख रुपए बरामद हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, आरोपी इंदरपाल उर्फ ताऊ कर्ज से परेशान था, जिसके चलते उसने व्यापारी के घर लूट की योजना बनाई। बताया जा रहा है कि वह 11 दिसंबर को ही जेल से छूटकर बाहर आया था।
घटना 19 दिसंबर की है। सुबह करीब नौ बजे अनूपशहर के मोहल्ला पोखर निवासी व्यापारी शंकर भगवान के घर चार बदमाश पहुंचे। उन्होंने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए दरवाजा खुलवाया और घर में घुस गए। इसके बाद तमंचे के बल पर घर के सभी सदस्यों को डरा-धमकाकर एक कमरे में बंद कर दिया। करीब आधे घंटे तक घर में लूटपाट करने के बाद बदमाश करीब 40 लाख रुपए के जेवरात और 12.30 लाख रुपए की नकदी लेकर फरार हो गए।
दिनदहाड़े हुई इस लूट की वारदात से पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी मौके पर पहुंचे और शीघ्र खुलासे के लिए स्वाट टीम और अनूपशहर पुलिस को आवश्यक निर्देश दिए थे, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने 12 दिन के भीतर इस मामले का खुलासा किया। स्वाट टीम प्रभारी असलम, प्रदीप कुमार, कपिल नैन, प्रदीप कुमार, आरिफ, रोहित कुमार, नरेन्द्र कुमार, सचिन चौहान और अनूपशहर पुलिस की टीम ने करीब 400 सीसीटीवी फुटेज खंगाले। जांच में सामने आया कि गांव रूपवास ऐंचोरा निवासी संजय शर्मा, जो पहले व्यापारी की दुकान पर ट्रैक्टर चलाकर मजदूरी करता था, उसने ही इस पूरी वारदात की साजिश रची थी। संजय ने लगभग चार महीने पहले ही दुकान पर मजदूरी करना छोड़ दिया था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी संजय शर्मा पहले भी मारपीट के एक मामले में जेल जा चुका है। जेल में ही उसकी मुलाकात गैंग के सरगना याकेश यादव, यशपाल उर्फ राजा यादव और दीपक यादव से हुई थी। दुकान से मजदूरी छोड़ने के बाद संजय ने इन तीनों से संपर्क किया और उन्हें व्यापारी के घर में करीब एक करोड़ रुपए के जेवरात व नकदी होने की बात बताई थी।
तीनों आरोपी क्रिमिनल, पहले भी की थी डकैती बताया जा रहा है कि आरोपी याकेश यादव, यशपाल उर्फ राजा यादव व दीपक यादव हार्डकोर क्रिमिनल हैं और वह सितंबर 2025 में ही जेल से छूटकर आए थे। आरोपियों ने नोएडा के सेक्टर 24 में डकैती की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 40 लाख रुपए के जेवरात और 5.35 लाख रुपए की नकदी बरामद की है।
तीन दिन रेकी, फिर बिना मोबाइल की थी वारदात चारों आरोपियों ने तीन दिन तक व्यापारी के घर की रेकी थी। आरोपी संजय शर्मा को पहले से पता था कि व्यापारी घर से कब निकलता है। इसके बाद भी वारदात को फुल प्रूफ करने के लिए पहले तीन दिन रेकी की गई और फिर बिना मोबाइल साथ लिए वारदात को अंजाम दिया था। आरोपियों को पता था कि मोबाइल का प्रयोग करने से पुलिस उन तक आसानी से पहुंच सकती है। ऐसे में उन्होंने अपने मोबाइल घर ही छोड़े थे।
माल का बंटवारा किया और फिर हो गए फरार वारदात के बाद आरोपियों ने लूटे गए माल का बंटवारा किया और अपने-अपने घर चले गए थे। इसके बाद जब मामला मीडिया में सुर्खियां बना तो आरोपी अपने दोस्तों व रिश्तेदारों के घर जाकर छिप गए थे।
2014 में डाली थी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी डकैती
कुख्यात डकैत इंदरपाल उर्फ ताऊ ने वर्ष 2014 में बुलंदशहर नगर स्थित एलएम ज्वेलर्स पर दिनदहाड़े पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी डकैती को अंजाम दिया था। उस समय इंदरपाल उर्फ ताऊ उत्तराखंड में हुई एक डकैती के मामले में हल्द्वानी जेल में बंद था। जेल में रहते हुए ही उसने एलएम ज्वेलर्स डकैती की साजिश रची थी।
बताया जाता है कि हल्द्वानी सिटी थाने में तैनात अलीगढ़ निवासी एक कॉन्स्टेबल, इंदरपाल उर्फ ताऊ और सतीश की जेल में मुलाकात हुई थी। इसी दौरान एलएम ज्वेलर्स डकैती की योजना बनाई गई। सतीश ने जेल में साथ रहे दो अन्य बदमाशों को अपने साथ मिलाया और अलीगढ़ कोर्ट में पेशी से लौटते समय उत्तराखंड पुलिस के सिपाहियों से सांठगांठ कर पूरी वारदात को अंजाम दिया गया।
11 साल तक जेल में रहा ताऊ
करीब 12 वर्ष पहले दिल्ली में हुई एक डकैती के बाद इंदरपाल उर्फ ताऊ पर 10.5 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था। इसके बाद वह गिरफ्तार हुआ और दिल्ली, उत्तराखंड तथा गुजरात की विभिन्न जेलों में कुल 11 साल की सजा काटी। मार्च 2014 में जेल से रिहा होने के बाद उसने सतीश के साथ मिलकर अपने गिरोह को दोबारा सक्रिय किया और अपराध की दुनिया में फिर से उतर आया।
जेल को बनाया गैंग भर्ती का केंद्र
अपनी कैद के दौरान इंदरपाल उर्फ ताऊ ने जेल को ही गैंग की भर्ती का केंद्र बना लिया था। वह जेल में मौजूद शातिर और नए बदमाशों को अपने गिरोह में शामिल करता था। खास बात यह थी कि वह एक बदमाश को एक ही वारदात में शामिल करता और दूसरी वारदात में उसे नहीं ले जाता था, ताकि पुलिस को सुराग न मिल सके। उसकी प्राथमिकता पढ़े-लिखे और समझदार बदमाशों को गैंग में शामिल करने की रहती थी।
30 से अधिक डकैतियों में एक क्विंटल से ज्यादा सोना लूटा
सोना लूटना इंदरपाल उर्फ ताऊ का शौक माना जाता है। पुलिस के अनुसार, अब तक की 30 से अधिक डकैती की वारदातों में उसने एक क्विंटल से ज्यादा सोना लूटा है। इसमें गुजरात के सूरत में 30 किलो, दिल्ली के लाजपत नगर में 20 किलो, दिल्ली के शकरपुर में 10 किलो, मथुरा के एक शोरूम से 10 किलो, हरियाणा के फरीदाबाद से 7 किलो और बुलंदशहर के एक शोरूम से 6 किलो सोने की डकैती शामिल है।

