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यूपी में चांद छाप यूरिया नहीं मिलेगी, फैक्ट्री बंद

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यूपी की सबसे बड़ी फैक्ट्रियों में शुमार कानपुर फर्टिलाइजर एंड केमिकल्स लिमिटेड को अब बंद कर दिया गया है। यह फैक्ट्री दिवालिया हो चुके जेपी ग्रुप की है। तालाबंदी की घोषणा के बाद बंदी का नोटिस भी लगा दिया गया है। इस फैसले के बाद 2 हजार लोगों की नौकरियां का संकट खड़ा हो गया है।

कर्मचारियों का सड़क पर प्रदर्शन फैक्ट्री बंदी के विरोध में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस नेताओं ने अपर श्रमायुक्त कार्यालय में प्रदर्शन किया। श्रम प्रवर्तन अधिकारी को ज्ञापन सौपा। संगठन के सेक्रेट्री असित कुमार ने कहा- फैक्ट्री बंद होने से खाद का संकट बढ़ जाएगा। यूरिया की कमी से अनाज और दालें महंगी होंगी। सरकार की पॉलिसी से मजदूर और किसान बर्बाद हो रहे हैं। सरकार एक तरफ रोजगार देने की बातें कर रही है, दूसरी ओर रोजगार छीनने व औद्योगिक प्रतिष्ठानों को बंद करने का काम कर रही है।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने मजदूरों की छंटनी बंद करो, मजदूर–किसान एकता जिंदाबाद… के नारे लगाए गए। मजदूर नेताओं ने कहा कि गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लि. ने गैस सप्लाई बंद कर दी थी, जिस कारण यूरिया का उत्पादन बंद हो गया था।

कर्मचारी बोले- 90 दिन पहले नोटिस नहीं दी हर महीने फैक्ट्री से 2 रैक प्रोडक्शन होकर जाता था, वो भी बंद हो चुका है। किसानों को सस्ते दरों में मिलने वाली खाद बंद हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी पिछले 17 दिसंबर से नहीं मिल रही है।

अचानक फैक्ट्री बंद करने के विरोध में मजदूर नेताओं ने कहा कि यूपी आईटी एक्ट की धारा 6–W के तहत 90 दिन पहले फैक्ट्री बंद करने की नोटिस देनी होती है, जो कि नही दी गई। अचानक फैक्ट्री बंद होने से मजदूर भुखमरी की कगार पर खड़े हो गए है।

सब्सिडी का भुगतान न होने से आया संकट बंदी को लेकर फर्टिलाइजर कारखाने के श्रम अधिकारी प्रदीप चतुर्वेदी ने बताया कि बंदी की घोषणा कर दी गई है। कंपनी के सीईओ आलोक गौड़ ने मीटिंग कर बंदी की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार ने कोई सहयोग नहीं दिया है। खाद पर सब्सिडी का भुगतान बंद होने से संकट खड़ा हो गया था। 18 दिसंबर से काम बंद चल रहा था।

कंपनी पर बैंकों की बड़ी देनदारी बता दें कि केएफसीएल जेपी एसोसिएट्स की कंपनी उत्तर भारत विकास प्राइवेट लिमिटेड की सहायक कंपनी है। जेपी एसोसिएट्स की सीमेंट, एक्सप्रेसवे, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पोर्ट्स संबंधी बिजनेस, फर्टिलाइजर, उड्डयन, कृषि एवं अन्य कारोबारी सहायक कंपनियां हैं, जिन्हें दिवालिया घोषित किया गया है। जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड पर बैंकों की अरबों की देनदारी है।

दिसंबर माह से नहीं दिया जा रहा वेतन एटक के जिला मंत्री असित सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि दिसंबर माह से ही स्थितियां विकट हो गई थी। लेकिन यूनियन के दबाव में मालिकों ने कर्मचारियों को दो जनवरी को मिलने वाला दिसंबर माह का वेतन 14 जनवरी को भुगतान कर दिया था। कंपनी सभी कर्मचारियों को बकाया भुगतान करेगी।

इस प्रकार रहा है कंपनी का इतिहास असित सिंह ने बताया कि चांद छाप यूरिया खाद का उत्पादन देने वाले कानपुर फर्टिलाइजर को झटका पर झटका मिलता रहा। इंडियन केमिकल इंडस्ट्रीज द्वारा 1970 में स्थापित रसायनिक खाद कारखाना आईईएल व फिर आसीआई के नाम से जाना जाता रहा। बाद में 1993 में इसे जीपी गोयनका के डंकन ग्रुप ने खरीद लिया। घाटा बर्दाश्त न कर पाने के कारण 6 जून 2010 को इसे जेपी ग्रुप ने खरीद लिया। तब उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार थी और जेपी ग्रुप फलफूल रहा था। इसका स्वामित्व जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड के पास था जो बाद जेपीएएल की सहायक कंपनी उत्तर भारत विकास लिमिटेड की इकाई यह कारखाना बन गया। जेपी ग्रुप के दिवालिया होने का असर इस पर भी पड़ा। अंजाम ये हुआ कि कंपनी को बंद करना पड़ा।

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