फरवरी से महंगी हो सकती है सिगरेट, इलेक्ट्रॉनिक सामान के बढ़ेंगे दाम
बड़ी खबर सिगरेट, BEE स्टार रेटिंग और फास्टैग से जुड़ी रही। अगले महीने से सिगरेट की कीमतें 20% तक बढ़ सकती है। इसकी वजह है सरकार की और से लगाई गई एक्साइज ड्यूटी। इसे लेकर 31 दिसंबर को एक नोटिफिकेशन जारी किया है। वहीं, 1 जनवरी से ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के नए स्टार रेटिंग नियम लागू हो गए हैं।
इससे रूम एयर कंडीशनर की कीमतों में 10% और फ्रिज के दाम में 5% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा, नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने नई कार के लिए KYV प्रोसेस बंद कर दी है। इससे 1 फरवरी 2026 से नई कार, जीप और वैन के लिए फास्टैग जारी करते समय अब KYV (नो योर व्हीकल) प्रोसेस की जरूरत नहीं होगी।
कल की बड़ी खबरों से पहले आज की सुर्खियां, जिन पर रहेगी नजर…
- शेयर बाजार में आज तेजी देखने को मिल सकती है।
- किआ सेल्टोस का फेसलिफ्ट मॉडल लॉन्च होगा।
- पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
अगले महीने से सिगरेट की कीमतें 20% तक बढ़ सकती है। इसकी वजह है सरकार की और से लगाई गई एक्साइज ड्यूटी। इसे लेकर 31 दिसंबर को एक नोटिफिकेशन जारी किया है।
इसके मुताबिक 1 फरवरी 2026 से सिगरेट की प्रति 1,000 स्टिक्स पर 2,050 रुपए से लेकर 8,500 रुपए तक की ड्यूटी ली जाएगी। बाजार जानकारों का कहना है कि टैक्स के इस बोझ को कम करने के लिए कंपनियां सिगरेट की कीमतें बढ़ा सकती है।
नए साल में रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) और एयर कंडीशनर (AC) जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण महंगे हो सकते हैं। 1 जनवरी से ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के नए स्टार रेटिंग नियम लागू हो गए हैं। इससे रूम एयर कंडीशनर की कीमतों में 10% और फ्रिज के दाम में 5% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
कंपनियों का कहना है कि नई रेटिंग के हिसाब से मशीनरी में बदलाव और महंगे कंपोनेंट्स के इस्तेमाल की वजह से यह इजाफा जरूरी हो गया है। साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी और ग्लोबल मार्केट में कॉपर (तांबा) के बढ़ते दाम भी मैन्युफैक्चरर्स पर दबाव बना रहे हैं।
1 फरवरी 2026 से नई कार, जीप और वैन के लिए फास्टैग जारी करते समय अब KYV (नो योर व्हीकल) प्रोसेस की जरूरत नहीं होगी। नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने नई कार के लिए KYV प्रोसेस बंद करने का फैसला किया है।
साथ ही, जिन कारों पर पहले से फास्टैग लगा है, उनके मालिकों को भी अब रूटीन KYV कराने की जरूरत नहीं होगी। इससे वाहन मालिकों को वैलिड डॉक्युमेंट होने के बावजूद लंबी वेरिफिकेशन प्रक्रिया के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

