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सीतापुर में सीएम योगी आदित्यनाथ, कहा- हम बंट गए तो समझो कट गए… 

सीतापुरः उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में भले ही अभी वक्त है. लेकिन सियासी तापमान बढ़ने लगा है. इसी कड़ी में एक बार फिर सूबे में बंटोगे तो कटोगे वाली बात गूंजने लगी है. सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट रूप से एक धार्मिक कार्यक्रम में कहा कि सनातन कमजोर होगा तो देश कमजोर होगा. सनातन मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा. देश का दुश्मन आंख लगाए बैठा है, हम बंट गए तो समझो कट गए. भूतकाल में हम कटे, क्योंकि हम बंटे थे. दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को सीतापुर पहुंचे, जहां उन्होंने तपोधाम सतगुरु गिरधारी नाथ जी महाराज तपोधाम आश्रम, सीतापुर में मूर्ति स्थापना दिवस एवं भव्य भण्डारा कार्यक्रम में संबोधित किया.

‘सीतपुर सनातन धर्म का पौराणिक स्थल’
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सीतापुर भारत के सनातन धर्म का पौराणिक स्थल है. भारत का वैदिक ज्ञान के संग्रह का स्वरूप देने व लिपिबद्ध देने का स्थल है. इसी स्मृति को बनाये रखने के लिए हम लोगों ने नैमिषारण्य को पुनर्स्थापित करने के लिए बड़े कार्य को अपने हाथों में लिया है. आप सोचिए, जहां आज से 3500 वर्ष पहले हजारों ऋषि मुनियों ने अनवरत एक जगह एकत्र होकर भारत के पुराणों को लिपिबद्ध करने का कार्य किया था. यही वह पवित्र स्थली है, इसी नैमिषारण्य में हम श्रद्धा भाव से जाते हैं.

‘राम के साथ एक रिश्ता हर भारतीय ने जोड़ा’
इसके अलावा सीएम योगी ने कहा कि ऐसे ही एक सिद्ध साधक हिंगलाज देवी के स्थान से यहां पर नहीं आया, वो अपने पूज्य गुरुजी के आदेश से यहां आए. उन्होंने यहीं अपनी साधना बढ़ाई. कुंभ की परंपरा भारत के अंदर हजारों वर्षों की है जैसे नैमिष की परंपरा है. अयोध्या उद्घाटन वाली तारीख लोगों के गौरव के आंसू थे. सुख दुख में अगर कुछ जाता है तो राम का नाम जाता है. राम के साथ एक आत्मीयता का रिश्ता हर भारतीय ने जोड़ा है. हर भारतीय समझता है हम सनातन धर्म के अनुयाई हैं इस पर गर्व करता है.

‘ऊंगली पकड़कर गला दबाने का प्रयास किया’
हमारे यहां कहा जाता है,पहला ग्रास गौमाता का और अंतिम ग्रास कुत्ते का. यानी गाय को हमने अपने हिस्से का दिया, साथ ही कुत्ते को भी दिया,यही है समदृष्टि. इसी को भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था ‘समत्वं योग उच्यते’…
समता का व्यवहार यही है. कितना भी जहरीला सांप हो, नागपंचमी पर उसको भी दूध-बताशा चढ़ाते हैं. यह इस देश मे ही हो सकता है, जो भी शरण मांगने आया उसको शरण मिली, लेकिन यहां कुछ लोगों ने शरण तो ली, लेकिन शरणार्थी के धर्म का निर्वहन नही किया. यहां आकर उंगली पकड़कर बाद में गला दबाने का प्रयास किया,देश को लूटने में कोई कसर नही छोड़ी.

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