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डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक फूट-फूटकर रोए

मेरठ के कवि सम्मेलन में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक अपने संघर्ष के दिनों को याद कर फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने कहा- जब मैं लखनऊ आया था, तो कड़ाके की ठंड में मेरे पास पहनने के लिए जूते तक नहीं थे। मैं गरीबी का दर्द अच्छी तरह समझता हूं, क्योंकि इसे खुद जिया है। मैं खुद को डिप्टी सीएम नहीं, गरीब का सेवक मानता हूं।

ब्रजेश पाठक का रोते हुए का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ये लगभग डेढ़ मिनट का है। डिप्टी सीएम नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में शामिल होने मेरठ पहुंचे थे। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक गुरुवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के मंच पर बेहद भावुक नजर आए। वह अपने पुराने दिनों और संघर्ष को याद कर रो पड़े। उन्होंने कहा- चप्पल होता था, जूता नहीं होता था। गर्मी में चप्पल, जाड़े में जूता मिलना मुश्किल होता था। जब एक गरीब व्यक्ति को मैं देखता हूं, सड़क पर वो दुखी है, तो मैं दुखी होता हूं। मुझे महसूस होता है।

बाबा साहेब को जब मैंने सुना तो मुझे लगा कि ये तो पिता समान हैं। मेरे पिताजी नहीं हैं, मैंने उनको अपना पिता माना। मैं अपने आपको यहां लायक समझता ही नहीं हूं, जहां मैं खड़ा हूं, मैं इस लायक अपने को समझता ही नहीं हूं। डिप्टी सीएम ने कहा- मैंने अपने आप अपनी दुनिया बनाई है। मुझे आटा माढ़ना नहीं आता था। जब आटा माढ़ता, तो कभी आटा ज्यादा होता तो कभी पानी ज्यादा हो जाता। कभी ज्यादा आटा माढ़ लेता और एक आदमी खाने वाला था।

अम्मा ने स्टोव दिया था, वो मिट्‌टी तेल का स्टोव होता था। लखनऊ आया तो उसी स्टोव पर रोटी पकाते थे। तो जानता हूं कि गरीबी क्या होती है। इसलिए मैं आपका सम्मान करता हूं। आप कितने बड़े व्यक्ति हैं। पल आते-जाते रहते हैं, लेकिन मां भारती के तिरंगे को आपने दुनिया में पहुंचाया। हापुड़ में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा- कांग्रेस और सपा परिवारवाद को ही बढ़ावा देती हैं। सपा में अखिलेश के बेटा-बेटी ही नेता बनेंगे, लेकिन कांग्रेस में कौन बनेगा? राहुल गांधी का नाम तो जानते हैं, लेकिन उनकी शादी तो हुई नहीं है। गांव के लोगों से पूछिए कि अब 56 साल में शादी कर लेंगे, तो क्या होगा, उनके बेटा-बेटी बनेंगे। 55-56 साल में कोई शादी होती है। होती है- बताओ, बताओ न… कोई जुगाड़ है क्या?

Umh News india

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