भक्त बांके बिहारी पहुंचे, कुंज गलियां ठसाठस, एक किमी लंबी लाइन
मथुरा के बरसाना और वृंदावन में सोमवार को 5 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने बांके बिहारी समेत अन्य देवी देवताओं के दर्शन किए। सबसे अधिक भीड़ बांके बिहारी, प्रेम मंदिर, निधिवन और और श्री जी मंदिर में देखने को मिली। सुबह 8 बजे ही यहां की गलियों श्रद्धालुओं से खचाखच भर गई। पैर रखने तक की जगह नहीं बची।
मंदिरों के बाहर एक किलोमीटर तक लाइन लग गई। भीड़ में कई बच्चे और बुजुर्ग फंस गए। वे चीखने-चिल्लाने लगे। शोर सुनकर पुलिस उनके पास पहुंची। बड़ी मुश्किल से उन्हें बाहर निकलवाया। उसके बाद वे किसी तरह से मंदिर के पास पहुंचे। तब जाकर दर्शन हो पाए। भक्तों के आने का सिलसिला जारी है। वे नाचते -गाते हुए परिवार के साथ आ रहे हैं।
भीड़ को देखते ही जगह -जगह पुलिस को तैनात कर दिया गया है। पुलिस बारी-बारी से लोगों को आने जाने की अनुमति दे रही है। शाम तक भीड़ का आंकड़ा 6 लाख के पार पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
बांके बिहारी मंदिर दर्शन करने आए श्रद्धालुओं ने बताया- सुबह 8 बजे ही मंदिर के पास पहुंचे गए। भीड़ अधिक थी इसलिए लाइन में खड़ा होना पड़ा। ढ़ाई घंटे बाद, 10:30 बजे नंबर आया। तब जाकर दर्शन कर पाए। बांके बिहारी मंदिर के दर्शन करके अच्छा लगा। बांके बिहारी के दर्शन के लिए 2 घंटे तो और भी देर लगती तो भी बिना दर्शन किए नहीं जाते। बांके बिहारी, प्रेम मंदिर, निधिवन समेत अन्य मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतार है। सुबह 6 बजे से श्रद्धालुओं को एंट्री दी जा रही है। श्रद्धालु यहां अपने परिजन और दोस्तों के साथ पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि पहले भी दर्शन के लिए यहां आते रहे हैं लेकिन गणतंत्र दिवस पर कभी इतनी भीड़ नहीं दिखी। हाल के दिनों में बांके बिहारी के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ में इजाफा हुआ है। प्रेम मंदिर, निधिवन समेत अन्य मंदिरों से दर्शन कर वापस लौटने वाले श्रद्धालुओं के कारण चौराहों पर जाम जैसे हालत बन गए हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जगह-जगह ट्रैफिक और पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। लोगों को जगह-जगह रोका जा रहा है। ट्रैफिक कम होने के बाद ही उन्हें आगे जाने की अनुमति दी जा रही है। मंदिरों के आस पास रहने वाले लोगों को आज तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भीड़ के कारण गलियां खचाखच भरी हुई है। लोग न तो अपनी गाड़ियां निकाल पा रहे हैं और न ही कही आ और जा पा रहे हैं। वे घरों के दरवाजे बंद कर अंदर बैठे हैं। भीड़ कम होने का इंतजार कर रहे हैं।

