सुना है कोई सतुआ बाबा और बथुआ बाबा हैं : अखिलेश
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सीएम योगी पर पलटवार करते हुए कहा- कुछ लोग नींद से तो उठ जाते हैं लेकिन होश में नहीं आते। आंखें दिनभर बंद रहती है, जाग कर भी मदहोश रहते हैं।
उन्होंने कहा- सुना है कोई सतुआ बाबा हैं और बथुआ बाबा हैं। लेकिन मौसम तो बथुआ का है। इसलिए हमें बहुत सावधान रहता है जो लोग एड देखकर हमें धोखा दे रहे हैं। प्रचार कराकर हमें धोखा दे रहे हैं। सोचिए देश कहां पहुंच गया और कहां जाना चाहिए था। देश संविधान पर चले और संविधान देखकर फैसले हो।
पूर्व सीएम अखिलेश सोमवार को गणतंत्र दिवस पर कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा-आज शंकराचार्य पर भी संकट पैदा हो गया है। जिन मंदिरों का संरक्षण होना चाहिए था उन पर बुल्डोजर चलाया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने कहा- आज मंदिर तोड़े जा रहे हैं। शंकराचार्य पर संकट पैदा हो रहा है। जिन मंदिरों का संरक्षण होना चाहिए था, उन पर बुल्डोजर चलाया जा रहा है। उन्होंने सतुआ बाबा पर निशाना साधते हुए कहा कि सुना है कि एक कोई सतुआ बाबा, कोई बथुआ बाबा हैं। मौसम तो बथुआ का है।
उन्होंने कहा कि किसी दिन भी भारत सरकार झुक जाएगी। अमेरिका से नान वेज मिल्क प्रोडक्ट भी भारत में आ जाएंगे। सोचिए अगर ऐसा होता है तो हमारे साधु संतों का क्या होगा? व्रत कैसे रख पाएंगे? हमारी माताएं बहनें जो व्रत रखती हैं।
सपा प्रमुख ने कहा- आज तो कमाल हो गया..एक विज्ञापन देख रहा था कि हम भारत को आत्म निर्भर बना रहे हैं। ये बात भी विदेशी कंपनी कह रही है। किस को धोखा दे रहे हैं। कुछ लोग नींद से उठ जाते हैं लेकिन होश में नहीं आते। जिनकी आंखें दिन भर बंद रहती हैं जाग कर भी मदहोश रहते हैं। ऐसे लोगों से बहुत सावधान रहना है।
अखिलेश यादव ने कहा-जो लोग हारने लगे हैं वो एसआईआर ले आए हैं। ये एसआईआर नहीं एनआरसी करा रहे हैं। प्रधानमंत्री के मन की बात पर निशाना साधते हुए कहा कि वोट पर मन की बात कर रहा था। सरकार पूरा प्रयास कर रही है कि वोट काट दिया जाए। अगर वोट काट दिया जाएगा तो नागरिकता का सवाल खड़ा हो जाएगा। क्योंकि हर नागरिक को वोट देने का अधिकार है। ये वोट का अधिकार पहले छीन रहे हैं फिर आप कहां जाएंगे? इनसे सावधान रहना पड़ेगा।
किसानों के मुद्दे पर अखिलेश ने याद दिलाते हुए कहा कि सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था लेकिन स्थिति बद से बदतर हो गई है। अब विदेशी उत्पादों और नॉन-वेज मिल्क प्रोडक्ट्स के आने से सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे साधु-संतों, व्रत रखने वाली माताओं-बहनों का नुकसान होगा।

