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‘मैंने दीक्षा ली है, साध्वी नहीं बनी हूं’, महाकुंभ में आईं खूबसूरत इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने तोड़ी चुप्पी

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दिल्ली. सोशल मीडिया पर इस दिनों उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले की चर्चाएं जोरों पर हैं. 12 सालों बाद आए महाकुंभ में श्रद्धालु आस्था में अमृत डुबकी लगा रहे हैं. तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं. 13 जनवरी को निरंजनी अखाड़े की पेशवाई के दौरान कैमरे की नजरें हर्षा रिछारिया पर जा टिकीं. अब तक अगर आप नहीं जानते कि कौन हैं हर्षा रिछारिया तो आपको बताते हैं कि क्यों आखिर इनकी चर्चा इतनी हो रही है.

दरअसल, निरंजनी अखाड़े की साध्वी हर्षा रिछारिया सुर्खियों में छा गई हैं. वे महाकुंभ में रथ पर सवार होकर पहुंची थीं और उन्हें सबसे सुंदर साध्वी कहा जा रहा है. इतनी सुंदर साध्वी कौन हैं, ये चर्चाएं तेज हुईं तो पता चला कि वो तो सोशल मीडिया एन्फ्लुएंसर हैं. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मैं अभी साध्वी नहीं हूं.

‘वेशभूषा देखकर साध्वी हर्षा का टैग दे दिया गया’
कैमरों में कैद हुईं हर्षा रिछारिया ने मीडिया से बातचीत में अपना सच लोगों के सामने रखा. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मैं अभी तक साध्वी नहीं बनी हूं. मैंने 2 साल पहले सिर्फ दीक्षा ली थी. इसके बाद कई संस्कार करने होते हैं. मेरी वेशभूषा को देखकर लोगों ने साध्वी हर्षा का टैग दे दिया गया.

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैंने कहीं ऐसा नहीं बोला है कि मैं बचपन से साध्वी हूं. साध्वी मैं अभी भी नहीं हूं. मैं इस ओर बढ़ रही हूं’. उन्होंने आगे साध्वी बनने के सवाल पर कहा कि परम पूज्य गुरुदेव जी जो आज्ञा होगी, उसे माना जाएगा.’ पुरानी तस्वीरों के वायरल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं चाहती तो अपनी पुरानी तस्वीरों को डिलीट कर सकती थी, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया. हर किसी का पास्ट होता है मेरा भी था’.

हर्षा ने कहा अपने काम के साथ-साथ भी भक्ति की जा सकती है. लेकिन अपने प्रोफेशनल को छोड़ना मेरा फैसला था. मैं अब जो भी कर रही हूं उसमें बहुत खुश हूं. अपने धर्म और संस्कृति से जुड़े रहना और उसे आगे बढ़ाना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि सुंदरता का भक्ति से कोई लेना-देना नहीं है. ईश्वर के ध्यान के लिए रंग रूप नहीं देखा जाता है. आगे क्या? के सवाल पर उन्होंने कहा कि जो भाग्य में होगा, वहीं होता है. मैं सब चीजों तो छोड़कर यहां आई, आगे जो ईश्वर की मर्जी होगी वैसा ही होगा.

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